उत्तराखंड में ऐसा कानून लागू हो गया है कि तबादलों में अब न मुख्यमंत्री की चलेगी न मंत्रियों की। प्रदेश के लाखों कर्मचारियों को तबादले का कानूनी अधिकार मिल गया है। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने प्रदेश सरकार के सभी विभागों को तबादला कानून के प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
10 जून तक जारी हो जाएंगे तबादला आदेश
तबादला कानून के तहत 10 जून तक सभी विभागों में तबादला आदेश जारी हो जाएंगे। 31 मार्च तक तबादलों के लिए आवेदक चिन्हित होंगे। इस अवधि में स्थानांतरण समितियां बनेंगी। ये प्रक्रिया एक अप्रैल तक पूरी करनी होगी। हर संवर्ग के लिए दुर्गम, सुगम क्षेत्र में खाली पदों और उनके लिए आवेदनों की संख्या के आधार पर सूची तैयार होगी। यह सूची 15 अप्रैल तक तैयार करनी होगी।
दुर्गम में भेजे जाएंगे सुगम में तैनात कर्मी
जो कर्मचारी लगातार चार सालों से सुगम इलाकों में तैनात हैं, उन्हें अनिवार्य रूप से दुर्गम इलाकों में तैनात किया जाएगा। बशर्ते वे किसी प्रकार की छूट के दायरे में न आते हों। वहीं सुगम से दुर्गम इलाके में स्वेच्छा से जाने वालों का स्वागत रहेगा। जो कार्यस्थल सात हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर हैं, वहां एक वर्ष की तैनाती को दुर्गम के दो साल की तैनाती के बराबर माना जाएगा।
तबादला प्रक्रिया में ये बातें होंगी अहम
ऐसे कर्मी जिनकी सुगम क्षेत्र में तैनाती को चार साल हो चुके हैं, या फिर उनके संपूर्ण सेवाकाल में सुगम क्षेत्र में दस साल की सेवा पूरी हो चुकी है और जो छूट की श्रेणी में नहीं आते हैं, उनको दुर्गम क्षेत्र में कुल रिक्तियों की सीमा तक स्थानांतरण के लिए चिन्हित करके तबादले किए जाएंगे। कर्मिकों द्वारा विकल्प को प्राथमिकता के क्रम में मांगा जाएगा, जिसे नोटिस बोर्ड या सरकारी वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाएगा। वहीं, दुर्गम स्थानों में अपनी तैनाती के स्थान पर तीन वर्ष या अधिक वर्ष से तैनात कार्मिकों का सुगम क्षेत्र में अनिवार्य तबादला किया जाएगा, बशर्ते उन्हें सुगम में जाने में कोई दिक्कत न हो। कुल सेवाकाल के दस साल दुर्गम में पूरे कर चुके कार्मिकों को सुगम में अनिवार्य स्थानांतरण किया जाएगा।
पद होने पर होंगे अनुरोध पर तबादले
अनुरोध के आधार पर सुगम में तबादले तभी किए जाएंगे, जब रिक्तियां होंगी। गंभीर रूप से रोगग्रस्त, विकलांग कार्मिकों को उनकी समस्या के आधार पर इच्छित तैनाती दिए जाने की व्यवस्था भी की गई है। मानसिक रूप से विक्षिप्त बच्चों के माता-पिता, सेवारत पति-पत्नी जिनका इकलौता पुत्र-पुत्री विकलांग हो आदि को भी तबादलों में राहत प्रदान की जाएगी। मुख्य सचिव के आदेश में तैनाती की अवधि प्रत्येक वर्ष 31 मई से जोड़ी जाएगी। सभी विभागों द्वारा शासन, विभाध्यक्ष, मंडल और जनपद स्तर पर स्थानांतरण समितियों का गठन होगा। विधानसभा में बीते साल पेश किए ट्रांसफर एक्ट को प्रवर समिति के पास भेज दिया गया था। भराणीसैंण में आहूत किए गए शीतक ालीन सत्र में इसे पास कर दिया गया। हाल ही में राज्यपाल ने भी इसे मंजूरी दे दी, जिसके बाद अब कानून बन गया है।
सबसे पहले सुगम से दुर्गम के प्रस्तावों पर विचार
स्थानांतरण समिति सबसे पहले सुगम से दुर्गम क्षेत्र में अनिवार्य स्थानांतरण पर विचार करेगी। इसके बाद अनुरोध वाले प्रकरण और सबसे आखिरी में दुर्गम से सुगम क्षेत्र के स्थानांतरण के मामलों पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा, समूह-क और ख श्रेणी के अधिकारियों को गृह जनपद में तैनाती नहीं दी जाएगी। समूह-ग के लिपिकीय और गैर प्रशासकीय कर्मचारियों और समूह-घ के कर्मचारियों को गृह स्थान से छोड़कर गृह जनपद (जहां का मूल निवासी हो) में तैनात किया जाएगा। प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरण सुगम से सुगम में नहीं होगा। प्रशासनिक आधार पर हटाए गए कर्मचारियों को पुन: किसी भी दशा में उसी जनपद और स्थान पर तैनाती नहीं दी जाएगी। मान्यता प्राप्त सेवा संघों के अध्यक्ष, सचिवों के स्थानांतरण संगठन में पद संभालने की तिथि से पद पर बने रहने या दो साल की अवधि जो भी पहले होगी, उस अवधि तक नहीं किए जा सकेंगे।