वरिष्ठता के आधार पर स्थाई नियुक्ति की मांग को लेकर प्रशिक्षित बेरोजगार एएनएम ने मुख्यमंत्री आवास कूच किया। पुलिस ने उन्हें कनक चौक पर ही बैरिकेडिंग लगाकर रोक लिया। बेरोजगार एएनएम वहीं धरने पर बैठ गईं। सिटी मजिस्ट्रेट कुश्म चौहान ने फोन पर उनकी बात स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से कराई। स्वास्थ्य मंत्री ने 20 जुलाई को वार्ता का समय दिया। फिर भी बेरोजगार एएनएम नहीं मानीं तो पुलिस करीब 35 प्रदर्शनकारी महिलाओं को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन ले गई। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। इससे पहले प्रदर्शनकारी एएनएम की पुलिस से नोकझोंक भी हुई।
उत्तराखंड बेरोजगार प्रशिक्षित एएनएम संघ की प्रांतीय अध्यक्ष मधु जोशी ने बताया कि वर्ष 2009 तक प्रशिक्षित एएनएम की नियमित नियुक्ति की जा रही थी। वर्ष 2011 में नियमित नियुक्ति के लिए जारी विज्ञप्ति के समय से विभाग के त्रुटिपूर्ण नियमों और निर्णयों के अधीन नियुक्तियों से सामान्य वर्ग की अधिकांश प्रशिक्षित एएनएम वंचित रहीं। वर्ष 2009 के बाद से उन्हें नियुक्ति की उम्मीद है, जबकि अन्य वर्ग की विज्ञान विषय से उत्तीर्ण प्रशिक्षित बेरोजगार 2016 तक एएनएम की नियुक्ति पा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि विभाग के गलत नियमों के कारण 53 पदों में भी सामान्य वर्ग के 20 पद ही भरे जा सके। जबकि, 33 पद रिक्त रह गए।
सामान्य वर्ग की नाराजगी दूर करने के लिए वर्तमान सरकार ने आठ मार्च 2018 को 380 पदों की विज्ञप्ति जारी की, लेकिन मामला कोर्ट पहुंच गया और विज्ञप्ति त्रुटिपूर्ण व नियमानुसार न होने के कारण प्रक्रिया निरस्त कर दी गई। उसके बाद से अभी तक विज्ञापन जारी नहीं किया गया है। वर्ष 2009 से वंचित अधिकांश अभ्यर्थियों की आयु 40-42 साल हो चुकी है। ऐसे में ज्येष्ठता के आधार पर एक सप्ताह के भीतर विज्ञप्ति जारी कर नियुक्ति दी जाए।