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ट्रेन ने ली गजराज की जान, लोको पॉयलट पर दर्ज होगा मुकदमा

Wed, 14 Sep 2016 09:10 PM IST
ब्यूरो/ अअमर उजाला, काशीपुर
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elephant died - फोटो : AmarUjala
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तराई पश्चिमी वन प्रभाग के आमपोखरा रेंज में मंगलवार रात रेल पटरी पार कर गोपीपुरा गांव की ओर आ रहे तीन हाथियों में से एक की दिल्ली जा रही कार्बेट लिंक एक्सप्रेस से टकराकर मौत हो गई। हाथी की मौत की सूचना से वन महकमे में हड़कंप मच गया। डीएफओ कहकशां के मुताबिक हाथी शेड्यूल वन का जानवर है, इसलिए ट्रेन चालक के खिलाफ वन्यजीव अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
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आमपोखरा रेंज के जंगल से मंगलवार रात करीब सवा दस बजे तीन हाथी रेलवे पटरी पार कर गोपीपुरा गांव में धान के खेतों की ओर जा रहे थे। इसी बीच एक हाथी रामनगर से दिल्ली जा रही कार्बेट लिंक एक्सप्रेस से टकरा गया।

टक्कर इतनी जोरदार थी कि भारीभरकम हाथी लुढ़कता हुआ दूर खेत के पास जा गिरा। साथी हाथियों के चिंघाड़ने की आवाज सुनकर ग्रामीण घरों से बाहर निकले तो एक हाथी को मरा हुआ देखा। ग्रामीणों को आशंका है कि ट्रेन की गति अधिक रही होगी।
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पेट में चोट लगने से फट गई थी आतें

elephant died - फोटो : AmarUjala
ग्राम प्रधान बाबू चौधरी की सूचना पर बीट कर्मचारी प्रेम सिंह घटनास्थल पर पहुंचे। नर हाथी के दोनों दांत सुरक्षित थे और एक दांत की लंबाई 1.45 मीटर है। बुधवार सुबह मुख्य वन संरक्षक डॉ. पराग मधुकर धकाते, डीएफओ कहकशां नसीम सहित अनेक अधिकारी मौके पर पहुंचे।

कार्बेट पार्क के पशु चिकित्सक डॉ. दुष्यंत और काशीपुर के पशु चिकित्सक डॉ. राजीव कुमार ने शव का पोस्टमार्टम किया। हाथी के पेट में चोट लगने से उसकी आंतें फट गई थीं, उसके पेट में खून जमा हो गया था।

डीएफओ कहकशां ने बताया कि नर हाथी की उम्र करीब 35 से 40 साल की है। उन्होंने बताया कि मृतक हाथी के दोनों दांत अलग करने के साथ ही शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद दफना दिया गया है।
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धान की फसलों तक धमक रहे हैं हाथी

हाथी का पोस्टमार्टम देखते लोग - फोटो : AmarUjala
ग्राम प्रधान बाबू चौधरी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से हाथियों का झुंड खेतों में धान की फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। इससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। रेंजर लक्ष्मण सिंह बिष्ट ने बताया कि कुछ दिन पहले ग्रामीणों ने हाथियों के गांव में घुसने की शिकायत की थी, जिसके बाद वहां श्रमिक रखे गए थे। हादसे के बाद अब गश्त बढ़ा दी गई है। 

पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं
2010 में सीमैप लालकुआं के पास ट्रेन की चपेट में आने से एक हाथी की टांग टूट गई थी। कई दिनों के इलाज के बाद उसकी मौत हो गई। अक्तूबर 2011 में इसी रेंज में सात चीतल ट्रेन से कटकर मारे गए थे। 28 नवंबर 2014 को चांदपुर के निकट ट्रेन से कटकर एक बाघिन की मौत हो गई थी। वहीं करीब चार साल पहले हेमपुर डिपो के पास टाइगर की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई थी।
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