अंग्रेजों के जमाने से ढोए जा रहे वित्तीय हस्त पुस्तिका (फाइनेंशियल हैंडबुक) के अनुपयोगी नियम बदलने की शुरुआत उत्तराखंड में हुई है।
शासन स्तर पर तमाम बार हुए मंथन के बाद सेवानिवृत्त वित्त सचिवों की एक कमेठी बनाने की तैयारी की गई है। फिलहाल अपर सचिव स्तर के एक अधिकारी को उन नियमों की छंटनी के लिए लगाया गया है, जो आजादी के लगभग सात दशक बाद किसी मतलब के नहीं रह गए हैं। जानकारों की मानें तो वित्तीय सुधारों के क्रम में यह एक बड़ा कदम है।
भारत के अन्य प्रदेशों की ही तरह उत्तराखंड में भी वित्त संबंधी सभी कार्यों का निस्तारण फाइनेंशियल हैंडबुक से किया जाता है। इसमें बजट बनाने से लेकर बल्कि विभिन्न मदों में जारी किए जाने वाली राशि, कर्मचारियों के देय एवं भुगतान समेत सरकार के सभी खर्च आदि के तरीके व नियम-कानून बताए गए हैं।
वित्त विभाग के एक अधिकारी की मानें तो इस हैंडबुक को आजादी के पूर्व अंग्रेजों ने वर्ष 1935 में तैयार किया था। उसके बाद से ही यह पूरे देश में लागू है। एक-आध बार इसमें मामूली संशोधन किए गए हैं, मगर ज्यादातर नियम अभी पुराने ही हैं। अंग्रेजों ने तत्कालीन व्यवस्था और संसाधनों के आधार पर इसे बनाया था, जिसमें से ज्यादातर परिस्थितियां अब पूरी तरह बदल चुकी हैं। ऐसे में इसके अधिकतर प्रावधान आज के वक्त अनुपयोगी हो गए हैं।
फाइनेंशियल हैंडबुक के तमाम नियम आज के समय में अनुपयोगी हो गए हैं। ऐसे में इन्हें संशोधित करने की आवश्यकता महसूस हो रही है। जल्द ही इस संबंध में एक कमेटी गठित की जाएगी, जो अनुपयोगी नियमों के संबंध में रिपोर्ट तैयार करेगी। उसके बाद आवश्यक औपचारिकताएं करके संशोधन किया जाएगा। यह वित्तीय सुधारों की दिशा में बड़ा प्रयास होगा।
- अमित सिंह नेगी, सचिव (वित्त)