रैली निकलें या शोभायात्रा या किसी वीआईपी की फ्लीट। राजधानी देहरादून की सड़कों पर जुटने वाले मजमों से हर बार यहां के बाशिंदों को ही जूझना पड़ता है।
कोई तरीका कारगर नहीं
घंटों तक सड़कों, चौराहों पर वाहन या तो फंसे रहते हैं या रेंगते नजर आते हैं। लंबे समय से शहर को जाम से निजात दिलाने की कवायदें होती रही हैं, लेकिन कोई तरीका कारगर साबित नहीं हुआ है। अब सीएम ने जाम की समस्या से मुक्ति के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय सलाहकार समिति का गठन किया है, जो जाम से बचने के उपाय सुझाएगी।
रणनीति बनाकर काम किया जाएगा
शुक्रवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सचिवालय में पत्रकारों को बताया कि दून में यातायात का दबाव बढ़ गया है। पीक टाइम में शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए कारगर कदम उठाना जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसके लिए रणनीति बनाकर काम किया जाएगा।
बताया कि सलाहकार समिति को जाम लगने के सभी पहलुओं पर गहन मंथन कर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद जल्द ही परिणाम नजर आने लगेंगे।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने जाम से निपटने के लिए पुलिस, प्रशासन और लोक निर्माण विभाग जैसे विभागों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत भी जताई। बताया कि अधिकारियों को यातायात सुचारु चलाते रहने के लिए पुलिसकर्मियों की कमी न होने देने का निर्देश दिया गया है।
विभागों में समन्वय न होने से परेशानी
पीडब्ल्यूडी, जलसंस्थान, बीएसएनएल, पुलिस समेत विभिन्न विभागों में तालमेल की कमी की वजह से जाम की स्थिति बनती है। ये विभाग अपनी सुविधा के अनुसार कभी भी, कहीं भी भूमिगत केबल डालने या सीवर लाइन के लिए खुदाई कर देते हैं। इस वजह से पुलिस की मौजूदगी के बावजूद जाम लगने लगता है। इसके अलावा सड़कों के चौड़ीकरण, फ्लाईओवर का निर्माण, बिजली के खंभों को शिफ्ट करने के प्रस्ताव भी समन्वय न होने से लटके रहते हैं।
स्कूलों में पार्किंग नहीं, सड़क पर जाम
शहर के अधिकतर स्कूल मुख्य मार्गों, चौराहों के पास हैं। लेकिन इनमें से ज्यादातर में पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। इससे स्कूलों के खुलने और छुट्टी के समय अभिभावकों या पिकअप वैन चालकों को वाहन सड़कों पर खड़े करने पड़ते हैं। राजपुर रोड, डालनवाला और ईसी रोड पर हर रोज दोपहर के वक्त स्कूलों के कारण जाम लगा रहता है। पुलिस कई बार ऐसे स्कूल प्रबंधनों को नोटिस जारी कर चुकी है, लेकिन पार्किंग की व्यवस्था नहीं की जा रही।
तय हो जुलूस-प्रदर्शनों का रूट
राजधानी में अक्सर विभिन्न संगठन सड़कों पर जुलूस-प्रदर्शन करते रहते हैं। शोभायात्राएं और बारातें भी यातायात व्यवस्था को प्रभावित करती हैं। मुख्यमंत्री हरीश रावत भी मानते हैं कि लोकतांत्रिक तरीके से होने वाले जुलूस-प्रदर्शनों के लिए रूट का निर्धारण किया जाना बहुत जरूरी है।
यहां रहता है अक्सर जाम
राजपुर रोड, चकराता रोड, घंटाघर, दर्शनलाल चौक, तहसील चौक, आढ़त बाजार, कारगी चौक, ईसी रोड, हरिद्वार रोड, जोगीवाला, पटेलनगर, आईएसबीटी, सहारनपुर रोड, धर्मपुर और रिस्पना तिराहा आदि।