आपदा के बाद उत्तराखंड में पर्यटकों को लुभाने के लिए सरकार के दावों की पोल औली नेशनल जूनियर एलपाइन एंड सीनियर क्रास कंट्री स्कीइंग स्पर्धा के आयोजन से खुल गई है।
न सीएम पहुंचे न ही उनका कोई नुमाइंदा
अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के लिहाज से सरकार खुद कार्यक्रम को महत्वपूर्ण मान रही है, जिसके चलते पर्यटन विभाग को आयोजन का सहभागी बनाया। सीएम कार्यक्रम का उद्घाटन कर संदेश देना चाहते थे कि पहाड़ पूरी तरह सुरक्षित हैं, लेकिन न तो सीएम पहुंचे न उनका कोई नुमाइंदा।
हिम्मत किसी ने नहीं जुटाई
आयोजक विटंर गेम्स एसोसिएशन आफ उत्तराखंड में बतौर संरक्षक दो कैबिनेट मंत्री अमृता रावत और दिनेश अग्रवाल के साथ सांसद सतपाल महाराज और स्थानीय विधायक राजेंद्र भंडारी हैं, लेकिन खराब मौसम में हवाई सफर छोड़ बदहाल सड़क मार्ग से औली पहुंचने की हिम्मत किसी ने नहीं जुटाई।
हाथ पांव फूल गए
आयोजकों को फिर भी सीएम का अपना प्रतिनिधि उद्घाटन के लिए भेजने के आश्वासन पर भरोसा था, लेकिन जब कोई नहीं पहुंचा तो उनके हाथ पांव फूल गए। आनन फानन में जिस कार्यक्रम का उद्घाटन सीएम से करवाना था उसका निर्धारित समय से दो घंटे देरी से नगर पालिका अध्यक्ष रोहणी रावत से करवाया गया।
दावों पर भी सवाल
ऐसी स्थिति में सरकार के उन दावों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसमें 5 मई से चारधाम यात्रा शुरू करने की बात कही जा रही है। विंटर गेम्स फेडरेशन आफ इंडिया के अध्यक्ष ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) एसएस पटवाल ने बताया कि सीएम कार्यालय से अवगत करवाया कि वह नहीं आ रहे लेकिन उनका प्रतिनिधि आएगा। जब कोई नहीं पहुंचा तो नगर पालिका अध्यक्ष ने उद्घाटन किया।
तो ऐसे शुरू होगी चार धाम यात्रा
देहरादून से औली तक का सफर में सड़कों पर आपदा का पड़ा असर आज भी साफ दिखता है। आठ माह में सड़कों का हाल जस का तस है। देवप्रयाग से श्रीनगर का मार्ग अभी तक नहीं सुधरा है। रुद्रप्रयाग के आसपास भी सड़क का सफर आपदा की यादें ताजा करता है।
सबसे खराब हालात बीस किलोमीटर लंबे चमोली से पिपलकोटी तक के मार्ग की है। पतालगंगा की स्थिति बेहद दयनीय है। सरकार का दावा है कि 15 अप्रैल तक सभी सड़कों को ठीक कर लिया जाएगा, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। क्षतिग्रस्त पुनर्निर्माण के नाम पर सिर्फ इतना हुआ है कि पहाड़ों से गिरने वाले लहासे वहां तैनात जेसीबी हर बारिश के बाद हटाकर किसी तरह यातायात चालू रख रहा है।
पर्यटन विभाग नहीं दिखा गंभीर
औली विंटर गेम्स का अचानक घोषणा कर उसमें पर्यटन विभाग की भागीदारी तय करने के पीछे सरकार का मकसद पर्यटन जगत को संदेश देना है कि उत्तराखंड के दुर्गम क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित हैं।
आपदा के बाद से प्रदेश की पर्यटन के क्षेत्र में बन रही नाकारात्मक छवि को सरकार किसी तरह बदलने की कोशिश में लगी है, जिसमें औली का आयोजन उन दावों की पोल खोल रहा है जिसका प्रचार सरकार कर रही है। गढ़वाल मंडल विकास निगम और आयोजकों के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा देश भर से पहुंचे खिलाड़ी भुगत रहे हैं।