चकराता। विगत बृहस्पतिवार और शुक्रवार को क्षेत्र में हुई बर्फबारी के बाद शनिवार को सप्ताहांत पर बड़ी संख्या में पर्यटकों ने चकराता का रुख किया, लेकिन पुलिस ने बाजार से पांच किलोमीटर पहले ही वाहनों को रोक दिया। इससे बाजार में ज्यादा पर्यटक नहीं पहुंचे। इस कारण व्यापारियों में पुलिस प्रशासन के विरुद्ध रोष है।
शनिवार को बर्फबारी का दीदार करने के लिए पर्यटकों ने चकराता का रुख किया और क्षेत्र में हुई बर्फबारी का जमकर लुत्फ उठाया। विगत बृहस्पतिवार को चकराता बाजार और क्षेत्र की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई थी। चकराता से आगे सड़क पर मोटी बर्फ जमी होने के चलते लोग चकराता से आगे नहीं जा पाए। उन्होंने चकराता के आसपास ही पड़ी हुई बर्फ का लुत्फ उठाया।
शनिवार को सुबह से क्षेत्र में चटक धूप खिली रही, जिससे ठंड में कुछ कमी भी रही। पर्यटकों ने भी मौसम का पूरा आनंद लिया। उन्होंने चकराता, चिलमिरी टॉप, आलू मंडी, देवबन मार्ग आदि जगह पहुंचकर बर्फ का लुत्फ उठाया। पर्यटकों ने अपने मोबाइल कैमरों में यहां के नजारों को कैद किया और एक दूसरे पर बर्फ के गोले फेंके। वहीं क्षेत्र के होटलों में भी पर्यटकों की अच्छी आमद रही। देर शाम तक चकराता और आसपास के अधिकांश होटल फुल हो गए थे। वहीं सुबह से खिली धूप से सर्दी से कुछ राहत मिली, लेकिन शाम को चली हवाओं से दोबारा ठंड बढ़ गई। सर्दी से बचने के लिए स्थानीय लोगों ने अलाव, हीटर, अंगीठी और गर्म कपड़ों का सहारा लिया। बर्फ जमी होने से सबसे ज्यादा परेशानी दिहाड़ी मजदूरों के सामने आई। वे अपने काम पर नहीं जा पाए, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचा।
जगाधरी से आए अजय जिंदल, सतीश जैन और कुंवर पाल और विकासनगर के संजय गुप्ता, नारायणगढ़ की सरिता, संतोष सिंह और विवेक गर्ग, देहरादून के दिनेश बलूनी और पंकज चड्डा आदि का कहना है कि बर्फ के दीदार कर मन को खुशी हुई। उन्होंने कहा कि बच्चों ने बर्फ का भरपूर आनंद लिया। उन्होंने कहा कि चकराता क्षेत्र बहुत खूबसूरत है, लेकिन यहां पर्यटकों के लिए मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
वाहनों को रोकने के बजाय व्यवस्था बनानी चाहिए
चकराता। व्यापार मंडल अध्यक्ष केशर चौहान, उपाध्यक्ष अनिल चांदना, सचिव अमित अरोरा, व्यापारी दिनेश चांदना, पंकज जैन और कमल रावत आदि का कहना है कि पर्यटकों के वाहनों को रोकने के बजाय पुलिस प्रशासन को व्यवस्था बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब व्यापार का समय होता है तो प्रशासन व्यापारियों का इस प्रकार से उत्पीड़न करता है। जब लोग बाजार ही नहीं पहुंचेंगे तो व्यवसाय कैसे होगा। उन्होंने पुलिस के इस रवैये पर रोष प्रकट किया है।