ऋषिकेश में इंटरनेशनल योगा वीक का शुभारंभ करते हुए सीएम हरीश रावत ने टिहरी को पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित किए जाने की घोषणा की।
निश्चित रूप से प्रदेश के लिए बेहतर होगा
सोच अच्छी है और अगर ऐसा हो जाए तो निश्चित रूप से प्रदेश के लिए भी बेहतर होगा। लेकिन सवाल यह भी कि पहले से प्रदेश में जिन चार सर्किट को डेवलप किए जाने का प्रस्ताव था, उनकी सुध कौन लेगा।
इनमें से अभी दो पर ही काम शुरू हो पाया है। बाकी दो पर अभी भी कदम उठाया जाना बाकी है। जो सर्किट अभी छेड़ा तक नहीं गया है, वह आदिबद्री-सिमली-कर्णप्रयाग, चमोली-पीपलकोटी-वृद्ध बद्री, जोशीमठ-भविष्यबद्री-योगध्यान बद्री (पांडुकेश्वर), तपोवन-मलारी-नीति सर्किट है।
काम भी शुरू
संयुक्त निदेशक, पर्यटन एके द्विवेदी के अनुसार मसूरी-धनोल्टी-काणातल, ऋषिकेश-हरिद्वार-देहरादून के लिए पैसा मिल चुका है। काम भी शुरू हो गया है। कार्बेट-नैनीताल-कार्बेट पर भी काम हुआ है।
लेकिन तीर्थ क्षेत्रों को अपने में समेटे बाकी दो पर्यटन सर्किट अभी तक काम की बाट जोह रहे हैं। जबकि तीर्थ यात्रियों की दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण माने जाने वाले हिस्से इन्हीं के खाते में हैं। जरूरी है कि पहले इन पर भी तेज गति दिखाई जाए।
बाहरी एजेंसी की मदद से था चिन्हीकरण
इन पर्यटन सर्किट का चिन्हीकरण एक बाहरी एजेंसी आईएलएंडएफएस डेवलपमेंट कारपोरेशन की मदद से किया गया था। 12वीं पंचसाला योजना के लिए यह सारी कवायद की गई थी।
यह थे प्रस्तावित सर्किट
सर्किट1. मसूरी-धनोल्टी-काणातल, ऋषिकेश-हरिद्वार-देहरादून।
सर्किट2. कार्बेट-नैनीताल-कार्बेट।
सर्किट3. आदिबद्री-सिमली-कर्णप्रयाग, चमोली-पीपलकोटी-वृद्ध बद्री, जोशीमठ-भविष्यबद्री-योगध्यान बद्री (पांडुकेश्वर), तपोवन-मलारी-नीति।
सर्किट4. नानकमत्ता-टनकपुर-पूर्णागिरी-लोहाघाट, पिथौरागढ़-जौलजीबी-मडकोट-मुन्स्यारी-बागेश्वर-ताकुला-अल्मोड़ा-वनासुर।