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यहां हर सुबह शर्मिंदगी उठाती है महिलाएं

Sat, 28 Jun 2014 02:06 AM IST
अमर उजाला, हरिद्वार
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हरिद्वार जिले के देहात क्षेत्र में पुरुष वर्ग महिलाओं से शर्म-हया की अपेक्षा तो करता है लेकिन शौचालय बनवाने में फिसड्डी हैं।
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हर सुबह महिलाओं को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। सार्वजनिक रास्तों के किनारे और खेतों में शौच के लिए जाती महिलाएं हर रोज शर्मसार होती हैं।

जिले के बहादराबाद, पथरी और धनौरी क्षेत्र के अधिकतर गांवों में आज भी अनेक परिवारों के घरों में शौचालय नहीं हैं।

बहादराबाद, बौंगला, रोहालकी किशनपुर, अलीपुर, अहमदपुर, फेरुपुर, शाहपुर, भुवापुर आदि गांवों में सुबह ही अनेक लोग खुले में दिशा शौच के लिए निकलते हैं।

पुरुष वर्ग की तो जैसे-तैसे निभ जाती है लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को झेलनी पड़ती है। महिलाओं को शौच के लिए घरों से काफी दूर जाना पड़ता है और इससे उनकी सुरक्षा को लेकर खतरा भी बढ़ जाता है।
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ये है सरकारी अनुदान की सच्चाई

अधिकतर ग्राम प्रधानों का कहना है कि गांव में निम्न आय वर्ग के लोग शौचालय बनाने का खर्च वहन नहीं कर पाते। सरकारी अनुदान इतना कम है कि उससे शौचालय का निर्माण नहीं हो सकता। यही कारण है कि गांवों के कई घरों में आज भी शौचालय नहीं हैं।

महिला ग्राम प्रधानों की जुबानी
शौचालय बनाने में 20 हजार के करीब खर्चा आता है। जबकि ग्रामीणों को स्वजल योजना से 46 सौ रुपये मिलते हैं। उसके लिए भी अधिकारियों के कई चक्कर काटने पड़ते हैं। खुले में शौच जाने वाली महिलाओं को शर्मिंदगी तो उठानी ही पड़ती है।
-सविता सैनी, प्रधान, रानीमाजरा

क्षेत्र के आधे से अधिक गांवों में शौचालयों का निर्माण नहीं हुआ है। गांवों में शौचालयों का निर्माण आवश्यक है। योजनाओं के प्रचार के अभाव में ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता।
-मेघवती, ग्राम प्रधान, फेरुपुर

गांव के अधिकांश परिवार मेहनत मजदूरी करके अपना परिवार पालते हैं। स्वजल योजना की ओर से जो 46 सौ रुपये दिये जाते हैं उससे शौचालय बनाना संभव नहीं होता। यदि ग्रामीण शौचालय बनाते हैं उन पर कर्जा हो जाता है इसलिए वे शौचालय नहीं बनवाते।
-सुधा सैनी, ग्राम प्रधान भुवापुर, चमरावल

गांव में शौचालय न होने से ग्रामीणों को खुले में शौच जाना पड़ता है। पास में ही राजाजी पार्क की सीमा लगे होने के कारण ग्रामीणों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडराता रहता है। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं का प्रचार प्रसार होना चाहिए।
-वनीता देवी, ग्राम प्रधान दौलतपुर।
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