मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि घोषणाएं तभी पूरी मानी जाएं जब धरातल पर दिखाई देें। उन्होंने निर्देश दिए कि अपूर्ण योजनाओं के बारे में कार्य प्रगति जैसे शब्दों से परहेज करें। उन्होंने कहा कार्य की वास्तविक स्थिति के बारे में स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। योजनाओं को लागू करने में अनावश्यक बहानेबाजी नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री राज्य सचिवालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अल्मोड़ा और बागेश्वर जिले में की गई घोषणाओं की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिन सड़कों और पुलों घोषणाएं हो चुकी हैं, उनके तत्काल शासनादेश जारी हों।
सड़कों, पुलों, पेयजल सिंचाई की योजनाओं, स्कूल व अन्य भवनों के निर्माण, खेल मैदानों पार्किंग स्थलों के विकास आदि से संबंधित योजनाओं के लंबित प्रस्तावों की डीपीआर 15 जुलाई तक हर हालात में तैयार हो जाए, ताकि उनके लिए धनराशि की स्वीकृति के साथ टेंडर प्रक्रिया भी अविलंब शुरू की जा सके। उन्होंने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में धनराशि की कमी नहीं होने दी जाएगी।
उन्होंने सल्ट विधानसभा क्षेत्र की पंपिंग पेयजल योजना तथा अल्मोड़ा की खत्याड़ी ग्राम सभा समूह पेयजल योजना के प्रस्ताव अविलंब जल जीवन मिशन के तहत भेजने के निर्देश दिए। विकासखंड ताकुला जाने वाले मार्ग के निर्माण के लिए वन विभाग एवं लोक निर्माण विभाग से आपसी विचार विमर्श के बाद इस संबंध में दो सप्ताह में निर्णय लेने को कहा।
मुख्यमंत्री ने पर्वतीय क्षेत्रों में निर्मित होने वाली सड़कों व पुलों के निर्माण में तेजी लाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शीघ्र टेंडर कर लिए जाएं ताकि बरसात के तुरंत बाद उन पर कार्य आरंभ किया जा सके।
बागेश्वर जिले में 66 में 39 घोषणाएं पूरी
बैठक में बताया गया है कि बागेश्वर जिले में 66 में से 39 घोषणाएं पूरी हो गई हैं। विधानसभा क्षेत्र कपकोट में 37 घोषणाओं में से 20 तथा बागेश्वर में 29 घोषणाओं में से 19 पूर्ण हो चुकी हैं। अल्मोड़ा जिले में 198 में से 117 घोषणाएं पूरी हुई हैं। अल्मोड़ा विधानसभा क्षेत्र में 32 घोषणाओं में से 16, सल्ट में 76 घोषणाओं में से 49, द्वारहाट में 16 में से 15 तथा सोमेश्वर की 74 में 37 घोषणाएं पूर्ण हो चुकी हैं।