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देश में हर साल छह प्रतिशत के हिसाब से बढ़ रहे बाघ, 3.8 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में हुआ सर्वे

Mon, 26 Aug 2019 08:20 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : फाइल फोटो
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भारतीय वन्यजीव संस्थान के शोध से साफ हुआ है कि देश में बाघों की संख्या प्रति वर्ष छह प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। इतना होने पर भी बाघ अपने कुल आवास क्षेत्र 3.8 लाख वर्ग किलोमीटर में से केवल 88985 वर्ग किलोमीटर तक में ही सिमटे हुए हैं।

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भारतीय वन्यजीव संस्थान का कहना है कि शेष जंगल में भी अगर बाघों के लिए प्राकृतिक आहार की व्यवस्था कर ली जाए तो मानव वन्यजीव संघर्ष को बहुत हद तक कम किया जा सकता है।

भारतीय वन्यजीव संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वाईवी झाला के मुताबिक बाघों की संख्या में यह इजाफा 2006 के बाद से देखने को मिल रहा है। हाल ही में बाघ गणना में भारतीय वन्यजीव संस्थान ने भी सहयोग किया था और यह गणना विश्व में रिकार्ड स्थापित करने वाली भी साबित हुई।
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इस गणना में 26838 स्थानों पर कैमरे लगाए गए। यह अपने आप में रिकार्ड है। इससे करीब 3.5 करोड़ फोटोग्राफ सामने आए। इन्हें एक विशेष सॉफ्टवेयर (कोट्रेट, एक्सट्रेट कंपेयर, हॉटस्पोटर) से छांटा गया।

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यह भी सामने आया कि उत्तर पूर्व, उड़ीसा में बाघों के संरक्षण के प्रयास और बढ़ाने की जरूरत है। दक्षिण पश्चिम घाट क्षेत्र में सुधार आया है। बुक्सा, पालामाऊ और डांपा क्षेत्र में कोई बाघ रिकार्ड नहीं किया गया। 

सबसे खास बात यह है कि बाघों का आवासीय वन क्षेत्र करीब 3.8 लाख वर्ग किलोमीटर का पाया गया है। इसमें से बाघ मात्र 88985 वर्ग किलोमीटर में सिमटे हुए हैं। ऐसे में शेष वन क्षेत्र में बाघों के लिए पर्याप्त आहार हो तो बाघों और मानव के बीच संघर्ष भी बहुत हद तक कम हो सकता है।

डा. झाला के मुताबिक बाघों की गणना को दुनिया में वन्यजीवों के सबसे बड़े सर्वे के रूप में देखा जा सकता है। यह गणना में 20 राज्यों का करीब 3.8 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सर्वे किया गया। 
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