अक्तूबर 2020 में ही शुरू हो गया था काम
सूत्रों की मानें तो पाखरो टाइगर सफारी का निर्माण अक्तूबर 2020 में ही शुरू हो गया था जबकि केंद्र की ओर से सितंबर 2021 में योजना पर कार्य शुरू करने की अनुमति प्रदान की गई थी। जबकि रिपोर्ट में दर्शाया गया है कि यह काम जुलाई से सितंबर 2021 के मध्य किया गया। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि कैसे इतनी महत्वपूर्ण योजना पर बिना वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति के इतने माह तक काम चलता रहा।
जिस अफसर के समय में शुरू हुआ काम, उसे मिली क्लीन चिट
पाखरो टाइगर सफारी का काम तत्कालीन डीएफओ अखिलेश तिवारी के समय में शुरू हुआ था। उन्हें वन मुख्यालय पहले ही क्लीन चिट दे चुका है। पीसीसीएफ की ओर से उन्हें बेनिफिट ऑफ डाउट देने की रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। इस मामले में एपीसीसीएफ कपिल जोशी की अध्यक्षता में एसआईटी बनाई गई थी। जोशी की रिपोर्ट के आधार पर पीसीसीएफ विनोद सिंघल ने कुछ अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की, लेकिन आईएफएस अखिलेश तिवारी को बेनिफिट ऑफ डाउट देते हुए रिपोर्ट आगे शासन को प्रेषित कर दी।
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पीएम का नाम जुड़ने से चर्चा में आई थी टाइगर सफारी
शुरू में इस योजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट बताकर प्रचारित किया है। तत्कालीन वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने खुद दिसंबर 2021 में प्रधानमंत्री की ओर से टाइगर सफारी का शुभारंभ करने की बात तक कही थी। अमर उजाला की पड़ताल में यह बात सामने आई थी कि इस योजना का प्रधानमंत्री या उनके कार्यालय से कोई लेना-देना नहीं है।