दो दशक से चल रहे थे इस कॉरिडोर को सक्रिय करने के प्रयास
चीला-मोतीचूर कॉरिडोर को सक्रिय करने के प्रयास दो दशक से भी अधिक समय से चल रहे थे। इसके लिए ऋषिकेश के खांड़ गांव को भी विस्थापित किया गया। इसके बाद हाईवे पर सितंबर 2021 में तीन प्लाई ओवर बनाए गए। इसके नतीजे अब मिलने शुरू हो गए हैं।
एक दिन में गुजरते थे एक लाख से अधिक वाहन
वर्ष 2019 के एनएचएआई के एक आकलन के अनुसार, फ्लाईओवर बनने से पहले देहरादून-हरिद्वार हाईवे पर कॉरिडोर के इस हिस्से में एक दिन में एक लाख 34 हजार गाड़िया गुजरती थीं। ऐसे में यह कॉरिडोर वन्यजीवों के लिए अघोषित तौर पर प्रतिबंधित हो गया था।
इस गलियारे से नेपाल तक विचरण करते थे वन्यजीव
चीला-मोतीचूर कॉरिडोर से हाथी, गुलदार और बाघ जैसे लंबे विचरण वाले वन्यजीव हरिद्वार से शिवालिक के जंगल होते हुए कार्बेट की ओर आते-जाते थे। कभी-कभी वन्यजीव नेपाल तक पहुंच जाते थे। लेकिन हाईवे के कारण यह आवाजाही बाधित हो गई थी। हालांकि इसी साल जनवरी में इस गलियारे से हाथियों के गुजरने की तस्वीरें भी कैमरा ट्रैप में कैद हुई थीं।
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उत्तराखंड ही नहीं देशभर के वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह बेहद खास खबर है। वन विभाग इस उपलब्धि से बेहद खुश है। अब पार्क के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में वन्यजीव आसानी से आवाजाही कर सकेंगे। लेकिन अभी इस कॉरिडोर के एक हिस्से में खांड़ गांव से लगते सेना के कुछ अधिष्ठान हैं, जिन्हें विस्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। - समीर सिन्हा, चीफ वाइल्ड लाइफ वॉर्डन, वन विभाग, उत्तराखंड