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रिपोर्टः बाघ वृद्धि की रफ्तार में उत्तराखंड है अव्वल

Thu, 22 Jan 2015 01:23 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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कर्नाटक में बाघ संख्यात्मक रूप से बेशक ज्यादा हों, पर वृद्धि दर में उत्तराखंड ने देश के सभी राज्यों को पछाड़ दिया है।
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कर्नाटक में बीते चार साल में बाघों की संख्या में जहां लगभग 35 फीसदी का इजाफा हुआ है तो इसी अवधि में उत्तराखंड में बाघों की संख्या तकरीबन पचास फीसदी बढ़ी है। मंगलवार को जारी हुई स्टेटस आफ टाइगर इन इंडिया 2014 रिपोर्ट साबित करती है भारत में बाघ सुरक्षित हैं।

उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश को छोड़ दें तो बाकी राज्यों में बाघों का कुनबा खूब फलफूल रहा है। इन दोनों राज्यों में बाघों की संख्या में गिरावट आई है। सबसे ज्यादा बाघ पश्चिमी घाट के राज्यों में मिले हैं। 2010 की गणना के अनुसार पश्चिमी घाट में 534 बाघ थे।
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यहां बाघों की संख्या 45.32 प्रतिशत बढ़कर 776 पहुंच गई है। इस घाट में कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और गोवा शामिल हैं। जबकि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार वाले शिवालिक गैंगेटिक प्लेन में बाघों की संख्या चार साल में 353 से बढ़कर 485 हो गई है।

आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, राजस्थान, झारखंड वाले पूर्वी घाट में बाघों की संख्या 601 से बढ़कर 688 पर पहुंची है। नॉर्थ ईस्ट हिल्स, सुंदरबन और ब्रहमपुत्र प्लेन में बाघों की कुल संख्या 218 से 277 हो गई है। उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश को छोड़ दें तो कुल मिलाकर बाघों की संख्या बढ़कर 2226 पहुंचना एक अच्छा संकेत बताया जा रहा है।

प्रदेशवार बाघों की संख्या और प्रतिशत वृद्धि

प्रदेश - 2010 - 2014 - प्रतिशत वृद्धि
कर्नाटक - 300 - 406 - 35.34
उत्तराखंड - 227 - 340 - 49.78
मध्य प्रदेश - 257 - 308 - 19.85
तमिलनाडु - 163 - 229 - 40.49
नॉर्थ ईस्ट हिल्स, ब्रहमपुत्र - 148 - 201 - 35.82
महाराष्ट्र - 169 - 190 - 12.43
असम - 143 - 167 - 16.79
केरल - 71 - 136 - 91.54
उत्तर प्रदेश - 118 - 117 - -0.84
सुंदरबन - 70 - 76 - 8.58
आंध्र प्रदेश - 72 - 68 - -5.56
छत्तीसगढ़ - 26 - 46 - 76.92
राजस्थान - 36 - 45 - 25
बिहार - 8 - 28 - 250
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बाघों के साथ चुनौती भी बढ़ी

उत्तराखंड में बाघों की संख्या में इजाफा होने के बाद अब वन विभाग के लिए चुनौतियां भी बढ़ गई हैं। बाघों के वासस्थलों की सुरक्षा के अलावा जंगलों में तस्करों की घुसपैठ रोकना भी एक बड़ी चुनौती होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक अभी तक प्रदेश में बाघों के करीब 12 कोरिडोर हैं, जबकि अभी कई और नए कोरिडोर तलाशने की आवश्यकता है।

प्रदेश में 2006 में बाघों की संख्या 178 थी, जो अब 340 पहुंच गई है। ऐसे में कार्बेट टाइगर रिजर्व और राजाजी राष्ट्रीय पार्क में बाघों के लिए नए वासस्थल विकसित करने की जरूरत है।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए)की ओर से मिलने वाली आर्थिक मदद से लगातार कार्बेट की सुरक्षा बढ़ाने का काम किया जा रहा है, लेकिन अभी यह अपर्याप्त है। बाघों की बढ़ी हुई आबादी की सुरक्षा के लिए और इंतजाम करने होंगे।

हर साल मरते हैं 25 बाघ
विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में हर साल करीब 25 बाघों की मौत होती है। कुछ बाघों की मौत प्राकृतिक होती है तो कुछ हादसे या शिकारियों का निशाना बन जाते हैं। बाघों की औसत उम्र 10 से 11 साल होती है। विशेषज्ञ के अनुसार हर दो साल में बाघिन तीन से चार बच्चों को जन्म देती है।

बाघों की संख्या में बढ़ोतरी अच्छी खबर है। अब हमें और सावधानी बढ़ानी होगी। अधिक सर्विलांस, नाइट विजन डिवाइस, कालागढ़ में लगे कंप्यूटर सॉफ्टवेयर डिवाइस की तर्ज पर और डिवाइस के अलावा सूचना तंत्र भी और मजबूत करना होगा। भारतीय वन्य जीव संस्थान और एनटीसीए के सहयोग से प्रदेश में ऐसे क्षेत्र चिह्नित करने होंगे, जो बाघ के वासस्थल के लिए हिसाब से सुरक्षित हों।
- आरबीएस रावत, पूर्व प्रमुख वन संरक्षक
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