लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बनने की तिब्बतियों की आशा फिलहाल निराशा में बदल चुकी है। निर्वाचन आयोग के आदेश के क्रम में जिला निर्वाचन में फोटो पहचान पत्र के लिए आवेदन कर चुके 60 तिब्बती लोक सभा चुनाव 2014 में मतदान नहीं कर सकेंगे।
निर्वाचन आयोग ने दी थी अनुमति
बता दें कि फरवरी 2014 में भारत निर्वाचन आयोग की ओर से 26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच जन्मे तिब्बती शरणार्थियों को मतदाता फोटो पहचान पत्र दिए जाने के आदेश के बाद समुदाय में खुशी की लहर थी। इसी क्रम में जिले में भी कई मतदाताओं ने आवेदन किया।
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उधर, मार्च में गृह व विदेश मंत्रालय की ओर से चीन से संबंध बिगड़ने का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर दी, जिससे तिब्बतियों को फोटो पहचान पत्र मिलना फिलहाल टल गया है।
गृह मंत्रालय ने जताई आपत्ति
तिब्बती रिफ्यूजी फाउंडेशन के अध्यक्ष पेमाजी सिथार ने निर्वाचन आयोग के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती को स्वीकारा। उन्होंने कहा कि आरसी के फरमान के चलते नगर के तिब्बती मतदाताओं को पहचान पत्र नहीं मिल पा रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि दिल्ली व कई जगह समुदाय के लोगों को वोटर आईडी मिली है और उन्होंने लोस में वोट भी किया है। येशी थुप्तेन ने कहा कि वह 2007 में अपना फोटो पहचान पत्र बना चुके हैं, जिससे 2 विधानसभाओं में वोट भी कर चुके हैं। इसी दौरान लगभग 4 अन्य के भी फोटो पहचान पत्र बने थे।
48 परिवार हैं नगर में
कैल्संग छुकी ने बताया कि नगर में तिब्बतियों के 48 परिवार हैं, जिनमें 150 से अधिक लोग हैं। इनमें लगभग 60 मतदाता हैं, जिन्होंने निर्वाचन कार्यालय में आवेदन भी किया था।
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तेंजिंग जिग्मे ने बताया कि उन्होंने भी फोटो पहचान पत्र के लिए आवेदन किया है, लेकिन अब उनसे रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट सरेंडर करने को कहा जा रहा है।
क्या है आरसी
नैनीताल। तिब्बती शरणार्थियों को दिया जाने वाला रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट उनके देश में रहने व शरणार्थी होने का प्रमाण है, जिसका प्रतिवर्ष नवीनीकरण किया जाता है। इसे सरेंडर करने के बाद तिब्बतियों की रिफ्यूजी की पहचान खत्म हो जाएगी तथा उन्हें भारतीय नागरिक माना जाएगा।