पीड़िता ने संबंधित व्यक्ति का मोबाइल नंबर भी पुलिस को उपलब्ध कराया। मुखानी पुलिस ने संबंधित धाराओं में आरोपी पर केस दर्ज कर लिया। जांच के बाद पुलिस ने मोबाइल नंबर के आधार पर बागेश्वर निवासी विक्रम मेहता और धरमपाल मौर्य को गिरफ्तार किया।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मुकेश चंद्र आर्य की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से छह गवाह पेश किए गए। सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने आरोपी विक्रम सिंह मेहता को आईपीसी और आईटी एक्ट की अलग-अलग धाराओं में तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास और एक-एक हजार के जुर्माने की सजा सुनाई। धरमपाल मौर्य को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त करार दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक अभियोजन अधिकारी मोहन सिंह रावत ने पैरवी की।