उत्तराखंड में सरकारी विभागों के कर्मचारियों के बाद अब सरकार ने बुधवार को निगमों में कार्यरत संविदा, दैनिक वेतन भोगी कर्मियों को नियमित होने का तोहफा दिया है।
गेंद अब निगमों के पाले में
हालांकि गेंद अब निगमों के पाले में है और निगमों के प्रबंधन मंडल पर निर्भर करेगा कि कितने और कब संविदा कर्मचारी नियमित होंगे। वैसे शासन का अनुमान है कि इससे करीब 10 हजार कर्मचारियों को फायदा होगा।
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अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा की ओर से बुधवार को जारी में निगमों में कार्यरत संविदा कर्मियों को नियमित करने की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति दी गई। हालांकि कर्मचारियों को नियमित करने में होने वाले अतिरिक्त खर्च भी निगमों को खुद ही वहन करना होगा।
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अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा के मुताबिक इससे करीब दस हजार कर्मचारियों को नियमित होने का मौका मिल जाएगा। शासन के दावे से अलग अब यह मामला बहुत कुछ निगमों की अपनी माली हालत पर भी निर्भर करेगा।
अपनी जेब से ही खर्च करेंगे निगम
बोनस और छठे वेतन आयोग की संस्तुतियों का लाभ देने की तर्ज पर ही शासन ने भी यह मामला निगमों के पाले में डाला दिया है। पहले की तरह ही यह भी कहा गया है कि कर्मचारियों को नियमित करने में निगम अपनी जेब से ही खर्च करेंगे।
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हालांकि अधिकतर निगम फिलहाल मान रहे हैं कि यह व्ययभार वहन करने में निगमों को खास परेशानी का सामना नहीं करना होगा।
राजपुर विधायक राजकुमार, राज्य निगम कर्मचारी महासंघ के महामंत्री रवि पचौरी, मनवर सिंह नेगी आदि के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से भी मुलाकात की।
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महासंघ के पदाधिकारियों के मुताबिक संविदा कर्मियों को नियमित करने के लिए पिछले कई महीने से कोशिश की जा रही थी। प्रदेश में करीब 20 निगम हैं जिनमें कई संविदा, वर्कचार्ज आदि के कर्मचारी काम कर रहे हैं।