दशकों तक पुलिस में सेवा करने के बाद अब पुलिस में पुलिस पेंशनर्स व सेवानिवृत्त पीपीएस अधिकारियों की सुनवाई नहीं हो रही है। किसी की बीमारी के इलाज का लाखों का बिल अटका है तो किसी के घर चोरी के आरोपियों को अब तक नहीं पकड़ा गया। कोई दफ्तर-दफ्तर घूम रहा है तो किसी की थानों में भी सुनवाई नहीं हो रही। ये सब दर्द सेवानिवृत्त पीपीएस अधिकारियों के वार्षिक सम्मेलन में एडीजी कानून व्यवस्था वी मुरुगेशन के सामने छलके। इस पर उन्होंने इन सेवानिवृत्त अधिकारियों को सेवाओं में सुधार का भरोसा दिलाया।
उत्तराखंड पुलिस पेंशनर्स कल्याण समिति एवं पीपीएस संगठन उत्तराखंड की ओर से वार्षिक सम्मेलन में सेवानिवृत्त अधिकारियों ने वर्ष भर का ब्योरा प्रस्तुत किया। बताया गया कि इस साल समिति में कुल 65 सदस्य नए जोड़े गए हैं। इस तरह सदस्यों की कुल संख्या 1135 पहुंच गई है। 828 सेवानिवृत्त पहचानपत्र बनाए गए हैं। यूपी के 33 सदस्यों को आईडी कार्ड यूपी से उपलब्ध कराए गए हैं। इसी तरह पीपीएस संगठन के सचिव श्रीधर बडोला ने भी बताया कि संगठन में तीन नए सदस्यों को जोड़ा गया है। अब संख्या 218 हो गई है। इसके बाद पदाधिकारियों ने पिछले साल उठाए गए बिंदुओं पर सफलता न मिलने पर नाराजगी जताई और मुख्यालय स्तर पर एक स्मरणपत्र प्रस्तुत किया गया।
इस दौरान पुष्कर सिंह नेगी ने कहा कि मेडिकल क्लेम कार्यालय में लंबे समय तक पड़े रहते हैं। इसके लिए स्थायी कर्मचारी नियुक्त न होने पर समस्या आ रही है। राकेश रतूड़ी ने एनपीएस कलेक्शन के लिए जिलों को सेवानिवृत्ति से पहले सेवारत रहते हुए इस कार्रवाई को पूरा करवाने की मांग की। बीके पांडेय ने बताया कि वह कैंसर पीड़ित हैं। उनका 12 लाख रुपये का इलाज का बिल अभी तक लंबित है। कुलदीप सिंह असवाल ने बताया कि वह लंबे समय से समस्या उठा रहे हैं कि जिला स्तर पर एसपी कार्यालय में बिलों के भुगतान के लिए एक-एक कर्मचारी नियुक्त किया जाए। बावजूद इसके अभी तक यह व्यवस्था नहीं हुई। रघुवीर सिंह राणा ने बताया कि उनके घर छिद्दरवाला में पिछले साल चोरी हुई थी लेकिन अब तक खुलासा नहीं हुआ।