करणवीर कौशल ने विजय हजारे ट्रॉफी के 26 साल के इतिहास में दोहरा शतक जड़ने वाले पहले बल्लेबाज के रूप में अपना नाम दर्ज कराया।
उन्होंने आंजिक्य रहाणे के 187 रनों के स्कोर को भी पीछे छोड़ दिया है। रहाणे ने 2017-18 में मुंबई की ओर से खेलते हुए महाराष्ट्र के खिलाफ सर्वाधिक स्कोर बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया था।
नहीं पता था रिकॉर्ड तोड़ दिया
विजय हजारे ट्रॉफी में पहला दोहरा शतक जड़ने वाले करणवीर को अंदाजा नहीं था कि उन्होंने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जो आज तक कोई भारतीय बल्लेबाज नहीं कर सका। उन्होंने बताया कि आउट होने के बाद जब वह पवेलियन लौटे तो साथियों ने उसे इस रिकॉर्ड की जानकारी दी।
करणवीर ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और महज 38 गेंदों में अपना अर्द्धशतक पूरा किया। इसके बाद अगली 32 गेंदों में 50 रन जोड़कर शतक बनाया। अगले सौ रन महज 62 गेंदों में ठोके। अपनी आतिशी पारी के दौरान करणवीर ने 18 चौके और नौ छक्के लगाए।
तीसरे नंबर पर पहुंचे करण
प्रतियोगिता में दोहरा शतक समेत तीन शतक जड़ चुके करणवीर रनों के मामले में तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। करण ने अब तक खेले गए सात मुकाबलों में कुल 77.83 के औसत से 467 रन बनाए हैं। करण ने पुडुचेरी के खिलाफ 101 और मिजोरम के खिलाफ 118 रन की पारी खेली थी।
प्रतियोगिता में करण का स्ट्राइक रेट सबसे ज्यादा है। हालांकि करण से ज्यादा रन बनाने में मणिपुर के यशपाल सिंह (488) और मेघालय के पुनीत बिष्ट (488) के नाम शामिल हैं। पुनीत उत्तराखंड मूल के क्रिकेटर हैं।
खुशी मनाते करणवीर के परिवारजन
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विजय हजारे ट्रॉफी में दोहरा शतक जड़ने की खबर जैसे ही करणवीर के घर पहुंची तो वहां जश्न का माहौल बन गया। आसपास के लोगों, रिश्तेदारों और दोस्तों ने करणवीर के माता-पिता को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।
करणवीर के पिता निर्मल कुमार शर्मा सहारनपुर में चौकी इंचार्ज और मां राधा रावत उत्तराखंड सचिवालय सुरक्षा में तैनात हैं। करण ने राजपुर रोड स्थित जसवंत मॉर्डन स्कूल से अपनी प्रारंभिक पढ़ाई की है। शुरुआत में करण को टेबल टेनिस खेलने का शौक था। 16 वर्ष में करण ने विधिवत रूप से क्रिकेट खेलना शुरू किया। करण को बॉडी बिल्डिंग का भी शौक है।
एबी डीविलियर्स को प्रेरणा मानने वाले करण तेज बल्लेबाजी करना पसंद करते हैं। माता-पिता करण को आईपीएस बनता देखना चाहते थे। हालांकि करण क्रिकेटर बनना चाहते थे। उत्तराखंड को बीसीसीआई की मान्यता न होने के चलते करण ने उत्तर प्रदेश का रुख किया, जहां रणजी ट्रॉफी कैंप में भी शामिल हुए। पत्नी दीपाली कौशल ने बताया कि पहली बार उत्तराखंड की टीम की प्रतियोगिता में शामिल होने को लेकर करण खासे उत्साहित थे।