उत्तराखंड परिवहन निगम में चलन से बाहर हो चुकीं बीएस-3 मॉडल की 429 बसें खरीदे जाने की थर्ड पार्टी जांच शुरू हो गई है।
निगम ने वर्ष 2016 में खरीदी गई बीएस-3 मॉडल बसों की खरीद से जुड़े दस्तावेज घोटाले की जांच कर रहे नियोजन विभाग को सौंप दी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर बस खरीद घोटाले में लिप्त अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। परिवहन निगम ने जुलाई 2016 में अशोक लीलेंड और टाटा कंपनी से अपने बेड़े के लिए करीब 100 करोड़ रुपये की कीमत की 429 बीएस-3 मॉडल बसें खरीदी थीं। उस समय बीएस-3 मॉडल के बंद होने और उसके स्थान पर बीएस-4 मॉडल का चलन शुरू होने की पूरी संभावना थी।
31 मार्च 2017 से बीएस-3 मॉडल बसों का चलन बंद हो चुका है। इसके बावजूद इतनी बड़ी संख्या में बसें खरीदे जाने से इस सौदे में मोटे कमीशन की आशंका को देखते हुए परिवहन मंत्री से जांच की मांग की गई थी, लेकिन मामला लटकता रहा। कुछ माह पूर्व परिवहन मजदूर संघ ने भी इस मामले की जांच निगम के अधिकारियों के बजाय थर्ड पार्टी या जांच एजेंसी से कराने की मांग की।
शासन स्तर पर इसकी जांच नियोजन विभाग को सौंप दी गई है। साथ ही वाहन खरीद से जुड़े सभी दस्तावेज भी नियोजन विभाग को उपलब्ध करा दिए गए हैं। परिवहन मजदूर संघ के प्रांतीय उप महामंत्री बालकृष्ण शर्मा ने बताया कि सितंबर 2017 को परिवहन मंत्री, परिवहन सचिव और परिवहन आयुक्त से जांच परिवहन निगम के अधिकारियों से न करवाकर थर्ड पार्टी से कराने की मांग की गई थी।
चलन से बाहर हो चुकी बीएस-3 मॉडल की बसों की खरीद की जांच नियोजन विभाग को सौंपी गई है। परिवहन निगम से वाहन खरीद से जुड़े सभी दस्तावेज मांगे गए थे। सभी दस्तावेज नियोजन विभाग को उपलब्ध करा दिए हैं।
- दीपक जैन, महाप्रबंधक, उत्तराखंड परिवहन निगम
नैनीताल को 200 और टनकपुर परिक्षेत्र को मिली 113 बसें
रुद्रपुर। वर्ष 2016 में खरीदी गईं 429 बसें निगम के तीनों परिक्षेत्रों को दी गईं। इनमें 200 बसें नैनीताल और 113 बसें टनकपुर परिक्षेत्र को मिली हैं। शेष बसें देहरादून परिक्षेत्र को मिली हैं। सूत्रों के अनुसार बस के खरीद के मामले में तीनों परिक्षेत्रों के अधिकतर अधिकारियों से पूछताछ हो चुकी है।