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ड्रग्स के खिलाफ जंग लड़ रही इन मर्दानियों ने पकड़वाए 50 से ज्यादा तस्कर

Wed, 08 Mar 2017 11:47 AM IST
राकेश शर्मा / अमर उजाला, देहरादून
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arrested - फोटो : demo photos
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देहरादून में डोईवाला के पास छोटे से गांव तेलीवाला की जाहिरा, हनीफा, मेहराज, गुलशन जैसी अनेक महिलाओं ने घर की चार दीवारों से बाहर निकल ड्रग्स के खिलाफ छेड़ी तो पुलिस को उनके जज्बे को सलाम करने को मजबूर होना पड़ा।
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ड्रग्स नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए उन्होंने न तो दिन और न ही रात की परवाह की, बल्कि तस्करों को घात लगाकर दबोचने के लिए कई कई घंटे गन्ने के खेतों में बिताए।

मुहिम को परवान चढ़ाने को कई ने तो शौहर, औलाद और रिश्तेदारों तक को नहीं छोड़ा। एक बरस में 50 से अधिक तस्कर इन महिलाओं की कोशिशों से जेल की सलाखों के पीछे पहुंचे। अब एक कदम और आगे बढ़कर इन अशिक्षित महिलाओं ने नशा की जद में आए युवाओं की काउंसलिंग की मुहिम भी छेड़ दी है।
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डोईवाला का इलाका ड्रग्स के लिहाज से बेहद संवेदनशील था। हालात यह थी कि कई महिलाएं तक इस धंधे अग्रणीय थी। नशे की इंतहा हुई तो तेलीवाला गांव से ड्रग्स कारोबार के खिलाफ चंद महिलाएं मुखर हुई। शुरूआती दौर में दिक्कत ही दिक्कत आई। अपनों के विरोध के साथ तस्करों की धमकियां तक आई, लेकिन वह अपने लक्ष्य से डगमगाई नहीं।
 
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इंस्पेक्टर पंकज गैरोला के सहयोग ने उनके प्रयासों को पंख लगे

पु‌लिस - फोटो : अमर उजाला
इसी बीच एएसपी तृप्ति भट्ट और तत्कालीन डोईवाला इंस्पेक्टर पंकज गैरोला के सहयोग ने उनके प्रयासों को पंख लगा दिए। मुहिम में अवरोध करने वालों को पुलिस ने सबक सिखाया तो उसका संदेश अच्छा गया। देखते ही चंद महिलाओं के इस ग्रुप ने बड़ा आकार ले लिया। तस्करों को पकड़वाने में इन महिलाओं ने लंबी जद्दोजहद की। उनका संघर्ष रंग लाया। तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के साथ काफी लोगों का नशा छुड़ाने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई।

एसपी क्राइम तृप्ति भट्ट कहती है कि यदि हर गांव में इस जज्बे के साथ महिलाएं मोर्चा संभाल ले तो निसंदेह नशा मुक्त समाज की कल्पना की जा सकती है। उन्होंने तस्करों को घेरने के लिए वह कई-कई घंटे गन्ने के खेत में बीताएं है। कई महिलाएं तो अपने शौहर और औलाद तक को जेल भेजने में नहीं हिचकी है।

खुद ही पुलिस को बुलाकर उन्हें पकड़वाया है। शुरूआत में महिलाओं की संख्या गिनती में थी, लेकिन फिर उनसे प्रेरणा लेकर महिलाओं का कारवां जुड़ता चला गया। 2014 और 2015 में ड्रग्स के चार और 16 मुकदमे थे। 2016 में उनकी बदौलत यह संख्या 61 तक पहुंच गई। अब उनका ग्रुप वादा संगठन का स्वरूप ले चुका है। जून में सीएम हरीश रावत ने उनकी मुहिम की सार्वजनिक रुप से सराहना कर चुके हैं।
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