देहरादून में डोईवाला के पास छोटे से गांव तेलीवाला की जाहिरा, हनीफा, मेहराज, गुलशन जैसी अनेक महिलाओं ने घर की चार दीवारों से बाहर निकल ड्रग्स के खिलाफ छेड़ी तो पुलिस को उनके जज्बे को सलाम करने को मजबूर होना पड़ा।
ड्रग्स नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए उन्होंने न तो दिन और न ही रात की परवाह की, बल्कि तस्करों को घात लगाकर दबोचने के लिए कई कई घंटे गन्ने के खेतों में बिताए।
मुहिम को परवान चढ़ाने को कई ने तो शौहर, औलाद और रिश्तेदारों तक को नहीं छोड़ा। एक बरस में 50 से अधिक तस्कर इन महिलाओं की कोशिशों से जेल की सलाखों के पीछे पहुंचे। अब एक कदम और आगे बढ़कर इन अशिक्षित महिलाओं ने नशा की जद में आए युवाओं की काउंसलिंग की मुहिम भी छेड़ दी है।
डोईवाला का इलाका ड्रग्स के लिहाज से बेहद संवेदनशील था। हालात यह थी कि कई महिलाएं तक इस धंधे अग्रणीय थी। नशे की इंतहा हुई तो तेलीवाला गांव से ड्रग्स कारोबार के खिलाफ चंद महिलाएं मुखर हुई। शुरूआती दौर में दिक्कत ही दिक्कत आई। अपनों के विरोध के साथ तस्करों की धमकियां तक आई, लेकिन वह अपने लक्ष्य से डगमगाई नहीं।