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दो नाम तय, होली के बाद उठेगा उत्तराखंड के नए मुखिया के नाम से पर्दा

Tue, 14 Mar 2017 12:04 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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सतपाल महाराज - फोटो : अमर उजाला
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भाजपा होली के बाद उत्तराखंड सीएम के नाम की घोषणा करेगी। पार्टी के केंद्रीय संसदीय बोर्ड की नई दिल्ली में हुई बैठक में उत्तराखंड के लिए पार्टी महासचिव सरोज पांडे और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर पर्यवेक्षक तय हुए हैं।
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सूत्रों की मानें तो दो घंटे चली बैठक में उत्तराखंड पर चर्चा के दौरान त्रिवेंद्र रावत की पैरोकारी अधिक मजबूत दिखी। इधर, सूत्रों से यह भी खबर है कि सतपाल महाराज का नाम सीएएम की रेस से बाहर है। अब ‌उत्तराखंड के नए मुखिया के रूप में त्रिवेंद्र सिंह रावत और प्रकाश पंत रेस में हैं।

डोईवाला विधायक त्रिवेन्द्र रावत के नाम आगे बताए जा रहे हैं। सूत्रों के हवाले से मिल रही खबरों के मुताबिक इस रेस में प्रकाश पंत और त्रिवेन्द्र सिंह रावत के बीच मुख्य मुकाबला है।
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पंत का स्पीकर एवं मंत्री के रूप में लंबा अनुभव और स्वच्छ छवि उनका मजबूत पक्ष है, जबकि त्रिवेन्द्र की केंद्रीय नेताओं से नजदीकी उन्हें लाभ दिला सकती है। हालांकि पूर्व केंद्रीय मंत्री और चौबट्टाखाल से विधायक सतपाल महाराज का नाम भी चर्चा में है, लेकिन उनका हाल ही में भाजपा में शामिल होना उनकी राह में रोड़ा बन सकता है, जिसका फायदा पंत और त्रिवेन्द्र रावत को मिलता दिख रहा है। सूत्रों का दावा है कि मुख्यमंत्री विधायकों में से ही चुना जाएगा।
 

पैराशूट से सीएम उतारने की संभावना न के बराबर

amit shah - फोटो : अमर उजाला
होली के तुरंत पर्यवेक्षक दून पहुंच कर भाजपा विधानमंडल दल की बैठक बुलाएंगे। संभावना है कि 16 मार्च तक सीएम चयन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने लगभग यह तय कर दिया है कि सीएम चुने विधायकों से होगा। पैराशूट से सीएम उतारने की संभावना न के बराबर है।

बंपर बहुमत के चलते केंद्रीय नेतृत्व के लिए नाम फाइनल करना मुश्किल नहीं है। होली के अगले दिन विधायकों को दून में रहने के निर्देश भी दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि उसी दिन भाजपा विधानमंडल दल की बैठक हो जाएगी।

बैठक में वरिष्ठ विधायकों में कोई प्रस्तावक के तौर पर नाम देंगे, जिस पर सभी की आम सहमति ली जाएगी। अगर एक से अधिक नाम सामने आए तो चर्चा या पक्ष में मत देने का भी प्रावधान है।

हालांकि पार्टी में ऐसी परंपरा नहीं है कि मतदान करवाया जाए, लेकिन प्रावधान है। पर्यवेक्षक संसदीय बोर्ड के समक्ष पारित प्रस्ताव रखेंगे, जिसके बाद अंतिम निर्णय राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह लेंगे।
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त्रिवेंद्र बने तो सतपाल कैसे होंगे एडजेस्ट

सतपाल महाराज
पार्टी के सामने सबसे बड़ी दिक्कत त्रिवेंद्र या सतपाल में से किसी एक के चुनने की है। सतपाल महाराज को पार्टी ने केंद्रीय राजनीति से विधानसभा चुनाव में उतारा है।

ऐसे में महाराज को कैबिनेट मंत्री की कुर्सी देने की संभावना कम दिखती है। उनको पार्टी कहां एडजेस्ट करेगी इस पर भी संशय है। हालांकि त्रिवेंद्र पहले भी मंत्री रहे हैं, तो उनके सीएम न बनने से एडस्ट करना महाराज की अपेक्षा आसान है।

कांग्रेस से भाजपा में आई विधायकों की टीम भी महाराज की स्पोर्ट में दिख रही है, हालांकि संघ की पैरोकारी त्रिवेंद्र के पक्ष में है।

इसके अलावा रविवार को पार्टी नेतृत्व के बीच पिथौरागढ़ विधायक प्रकाश पंत और केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा के नाम भी सीएम के लिए चर्चा में रहे, लेकिन पूर्व सीएम निशंक, खंडूड़ी और कोश्यारी पूरी तरह से रेस से बाहर बताए जा रहे हैं।
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