819.54 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले राजाजी टाइगर रिजर्व में एशियाई हाथी, बाघ, तेंदुए, भेड़िया, हिमालयी भालू, सांभर, हिरण, जंगली सूअर समेत वन्यजीवों की 49 प्रजातियां पाई जाती हैं।
राजाजी टाइगर रिजर्व के हाथियों, बाघों, तेंदुओं के साथ ही सभी प्रजातियों के वन्यजीवों और पक्षियों को पूरे साल पानी की उपलब्धता होगी। इसके लिए टाइगर रिजर्व प्रशासन की ओर से जल संरक्षण के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। दरअसल, टाइगर रिजर्व के बीचों बीच से गुजरने वाली नदियों के जल को संरक्षित करने की योजना बनाई जा रही है।
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बता दें कि 819.54 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले राजाजी टाइगर रिजर्व में एशियाई हाथी, बाघ, तेंदुए, भेड़िया, हिमालयी भालू, सांभर, हिरण, जंगली सूअर समेत वन्यजीवों की 49 प्रजातियां पाई जाती हैं। इसके अलावा टाइगर रिजर्व में मगरमच्छ, किंग कोबरा समेत सरीसृपों की बीस प्रजातियां रहती हैं।
जहां तक पक्षियों का सवाल है तो पूरे टाइगर रिजर्व क्षेत्र में 328 प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं। राजाजी टाइगर रिजर्व के इतनी बड़ी संख्या में वन्यजीवों, सरीसृपों और पक्षियों के सामने कई बार खासकर गर्मी के मौसम में पानी का संकट खड़ा हो जाता है। हालांकि, वन्यजीवों के लिए पानी की किल्लत ना हो इसके लिए टाइगर रिजर्व प्रशासन की ओर से पूरे टाइगर रिजर्व क्षेत्र में जगह-जगह वाटरहोल बनाए गए हैं। जिसमें टैंकरों की मदद से गर्मी के मौसम में जलापूर्ति की जाती है।
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लेकिन, अब टाइगर रिजर्व प्रशासन पूरे टाइगर रिजर्व क्षेत्र में पानी की उपलब्धता हो इसके लिए जल संरक्षण की योजना पर काम कर रहा है। राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला के मुताबिक टाइगर रिजर्व के वन्यजीवों को पानी की किल्लत ना हो इसके लिए जल संरक्षण की योजना पर काम किया जा रहा है। बताया कि वन्यजीवों के लिए पानी के साथ ही भोजन की प्रचूर मात्रा उपलब्ध हो इसके लिए भी टाइगर रिजर्व प्रशासन की ओर से तमाम कदम उठाए जा रहे हैं। जिसमें टाइगर रिजर्व क्षेत्र में फलदार पौधों का लगाया जाना भी शामिल है।