नव संवत्सर की शुरुआत 21 मार्च को नवरात्र में होने वाली भगवती आराधना से होगी। इस बार एक नवरात्र घट जाएगा। इसके विपरीत नए साल में 12 के बजाय 13 महीने होंगे। आषाढ़ मास पुरुषोत्तम मास के रूप में नव वर्ष में पड़ रहा है।
नवरात्र में तृतीया तिथि का क्षय है। ऐसा होने से द्वितीया और तृतीया को ब्रह्मचारणी तथा चंद्रघंटा की पूजा एक दिन होगी। नवरात्र 21 मार्च को आरंभ होंगे और 28 मार्च को रामनवमी के दिन संपन्न हो जाएंगे। अष्ठमी तिथि की पूजा 27 मार्च को होगी। जो श्रद्धालु सप्तम कालरात्रि का व्रत रखते हैं, उन्हें यह व्रत 26 मार्च को रखना होगा।
वासंती नवरात्र का संबंध भगवती के साथ-साथ भगवान श्रीराम से भी हैं। नवरात्र की नवमी तिथि को भगवान राम का जन्म हुआ था। रामनवमी का पावन पर्व 28 मार्च को पड़ रहा है।
इन दिनों नवान्ह पारायण का आयोजन जगह-जगह किया जाता है। ये मानस के ये पारायण 21 मार्च से शुरू होंगे। समापन 29 मार्च को नवरात्र पारणा के रूप में होगा।
वर्ष में दो आषाढ़ आ रहे हैं। शुद्ध आषाढ़ कृष्ण पक्ष तीन जून से शुरू होगा। पुरुषोत्तम मास 17 जून से 16 जुलाई तक रहेगा। शुद्ध आषाढ़ शुक्ल पक्ष 17 जुलाई से 31 जुलाई तक रहेगा। इस बार श्रावण कुछ दिन पीछे खिसक कर एक अगस्त से शुरू हो रहा है।