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13 महीनों का होगा नया साल, जानिए कैसे?

Wed, 18 Mar 2015 03:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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नव संवत्सर की शुरुआत 21 मार्च को नवरात्र में होने वाली भगवती आराधना से होगी। इस बार एक नवरात्र घट जाएगा। इसके विपरीत नए साल में 12 के बजाय 13 महीने होंगे। आषाढ़ मास पुरुषोत्तम मास के रूप में नव वर्ष में पड़ रहा है।
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नवरात्र में तृतीया तिथि का क्षय है। ऐसा होने से द्वितीया और तृतीया को ब्रह्मचारणी तथा चंद्रघंटा की पूजा एक दिन होगी। नवरात्र 21 मार्च को आरंभ होंगे और 28 मार्च को रामनवमी के दिन संपन्न हो जाएंगे। अष्ठमी तिथि की पूजा 27 मार्च को होगी। जो श्रद्धालु सप्तम कालरात्रि का व्रत रखते हैं, उन्हें यह व्रत 26 मार्च को रखना होगा।

वासंती नवरात्र का संबंध भगवती के साथ-साथ भगवान श्रीराम से भी हैं। नवरात्र की नवमी तिथि को भगवान राम का जन्म हुआ था। रामनवमी का पावन पर्व 28 मार्च को पड़ रहा है।
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इन दिनों नवान्ह पारायण का आयोजन जगह-जगह किया जाता है। ये मानस के ये पारायण 21 मार्च से शुरू होंगे। समापन 29 मार्च को नवरात्र पारणा के रूप में होगा।

वर्ष में दो आषाढ़ आ रहे हैं। शुद्ध आषाढ़ कृष्ण पक्ष तीन जून से शुरू होगा। पुरुषोत्तम मास 17 जून से 16 जुलाई तक रहेगा। शुद्ध आषाढ़ शुक्ल पक्ष 17 जुलाई से 31 जुलाई तक रहेगा। इस बार श्रावण कुछ दिन पीछे खिसक कर एक अगस्त से शुरू हो रहा है।
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आई वसंत ऋतु, शिशिर को विदाई

भगवान भास्कर मीन राशि में प्रविष्ठ हो गए हैं। इसी के साथ शिशिर ऋतु संपन्न हुई और वसंत ऋतु विधिवत आरंभ हुई। अब पेड़ों पर नए पत्ते आएंगे, नए फूल खिलेंगे। पतझड़ का मौसम बीत गया है।

17 सितंबर को शीत ऋतु का जन्म तब हुआ था, जब सूर्य नारायण कन्या राशि में आए थे। शास्त्रीय मान्यता है कि सूर्य के कन्या में आते ही शीत का आरंभ हो जाता है। शरद ऋतु 17 सितंबर को प्रारंभ हुई थी। 16 नवंबर के दिन जब सूर्य वृश्चिक राशि में आए, तब हेमंत ऋतु प्रारंभ हुई।

16 दिसंबर को सूर्य के धनु में प्रवेश करते ही भीषण ठंड का दौर प्रारंभ हो गया। अब सूर्यनारायण का प्रवेश मीन राशि में हुआ है। इसी के साथ वसंत ऋतु आरंभ हो गई है। मान्यता है कि भले ही हवाएं और बादल डरते रहे, किंतु भयभीत करने वाली ठंड विदा हो गई है।

दो महीनों तक वसंत ऋतु चलेगी। पिछली वसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा के साथ पतझड़ प्रारंभ हुआ था। होली के बाद धीरे-धीरे पतझड़ समाप्त होता चला गया। शाखों पर नए पत्ते निकल रहे हैं। बागों में नए फूल भी आ गए हैं। वसंत ऋतु सर्वत्र आनंद फैला रही है।
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