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बिना मरम्मत मोटर पुल को खोलने पर भड़के ग्व्रामीण, प्रदर्शन

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लालढांग पुल पर प्रदर्शन करते ग्रामीण। - फोटो : VIKAS NAGAR
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अमर उजाला ब्यूरो
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विकासनगर। उत्तराखंड और हिमाचल की सीमा पर लालढांग के पास बने मोटर पुल को बिना मरम्मत के खोलने पर ग्रामीणों ने आक्रोश जताया है। ग्रामीणों ने पुल खुलवाने गई जल विद्युत निगम की प्रबंधन टीम के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर उन्हें बैरंग लौटा दिया।
मालूम हो कि हिमाचल प्रदेश के किलोड़ घाटी और लालढांग को आपस में जोड़ने के लिए 70 के दशक में सिंचाई विभाग ने दोनों के बीच में टोंस नदी पर मोटर पुल का निर्माण किया था। इस पुल का निर्माण खोदरी पावर हाउस और छिबरो पावर हाउस को आपस में जोड़ने के लिए किया था। बरसात के दिनों में हरिपुर-कोटी-मीनस मार्ग के बंद होने पर इस मार्ग का इस्तेमाल सरकारी कर्मचारियों को निगम की बस से डाकपत्थर तक लाने-ले जाने में किया जाता है। इसके साथ ही हिमाचल के किलोड़ घाटी के लोग भी इस पुल का इस्तेमाल आवाजाही के लिए करते हैं।
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वर्तमान में पुल के रखरखाव का जिम्मा उत्तराखंड जल विद्युत निगम के पास है। वर्तमान में पुल से अवैध खनन से लदे भारी वाहनों की आवाजाही होती है। जिस कारण पुल बेहद खतरनाक हो गया है। बीते दिनों आईआईटी रुड़की और लखनऊ से आए इंजीनियरों की टीम पुल को असुरक्षित बता चुके हैं। जिसके बाद निगम प्रबंधन ने एहतियात के तौर पर गार्डर लगा पुल को भारी वाहनों के लिए बंद कर दिया था। लेकिन, अब ग्रामीणों का आरोप है कि निगम प्रबंधन बिना किसी मेंटीनेंस के गार्डर हटा पुल को फिर से भारी वाहनों के लिए खोल रहा है। जिससे पुल धराशायी हो जाएगा। लोगों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। कहा जब निगम प्रबंधन पुल की मेंटीनेंस नहीं कराता वह पुल को भारी वाहनों के लिए नहीं खोलने देंगे। वहीं जल विद्युत निगम मंडल डाकपत्थर के सहायक अभियंता पंकज कुमार ने बताया कि ग्रामीणों की मांग के संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। प्रदर्शन करने वालों में देशराज शर्मा, जय सिंह, गरीब दास, कलाम सिंह, रंगीलाल, उदयराम, बिशर सिंह, देवराज, भूप सिंह, धर्म सिंह, वीरेंद्र नंबरदार आदि शामिल रहे।
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