हरिदास को सीएम हरीश रावत का करीबी होने की चर्चाएं होती रहीं हैं।
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बसपा के झबरेड़ा से विधायक हरिदास की टिकट कटने की वजह उनकी सीएम हरीश रावत से नजदीकी मानी जा रही है। हरिदास का टिकट कटने के बाद सियासी हलकों में उनपर गिरी गाज की वजहों पर चर्चाएं तेज हो गई है। पार्टी सूत्रों की माने तो विधायक को इस बारे में पार्टी की ओर से भी अवगत करा दिया गया था।
झबरेड़ा से बसपा के विधायक हरिदास टिकट कटने की स्क्रिप्ट तो काफी पहले लिखी जा चुकी थी। इसका अंदेशा हरिदास को भी था। बुधवार को तो बस इस स्क्रिप्ट को सार्वजनिक रूप से सामने लाया गया है।
हरिदास का टिकट कटने के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि एक बार हरिदास सीएम हरीश रावत के साथ कांग्रेस में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच गए थे। उस वक्त केंद्र में यूपीए की सरकार थी और जिसको बसपा का बाहर से समर्थन था।
केंद्र की सरकार बचाने को हरिदास की नहीं हुई थी कांग्रेस में एंट्री
बसपा महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने किया प्रत्याशी का एलान
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उस वक्त कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने हरिदास और हरीश रावत को यह कहते हुए लौटा दिया था कि इससे केंद्र और राज्य दोनों जगहों पर कांग्रेस की सरकार अस्थिर हो जाएगी। मुख्यमंत्री हरीश रावत की नजदीकी की जानकारी पार्टी हाईकमान को पहले से थी।
कई बार उनके खिलाफ कार्रवाई तक की बात भी होती रही, लेकिन पार्टी ने चुनाव से ठीक पहले अपने पत्ते खोले हैं। हालांकि उनके टिकट कटने से पार्टी को नुकसान भी झेलना पड़ सकता है। हरिदास का अपने क्षेत्र में मजबूत जनाधार रहा है। लगातार तीन बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं।
वर्ष 2012 में विधानसभा परिसीमन के बाद वे झबरेड़ा से जीते जबकि इससे पहले दो बार में वह लंढौरा से विधायक रह चुके हैं।
अब केवल एक विधायक पर होना है फैसला
प्रत्याशियों की घोषणा करते पार्टी महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी
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वर्ष 2012 में बसपा को तीन सीटों पर जीत हासिल हुई थी, लेकिन विधायक सुरेंद्र राकेश के निधन के बाद बसपा विधायकों की संख्या दो ही रह गई थी।
अब केवल पार्टी का विधायक सरबत करीम अंसारी पर पार्टी को फैसला लेना है, जिनकी पार्टी के प्रति आस्था गठबंधन के दौरान भी बनी रही। फिलहाल सियासी जानकारों की नजर टिकट कटने के बाद हरिदास के अगले कदम पर है।
पार्टी हाईकमान के निर्देश पर हरिदास का टिकट काटा गया है। झबरेड़ा बसपा की परंपरागत सीट है। इस सीट पर हम इस बार भी जीत हासिल करेंगे।
-भृगुराशन राव, बसपा प्रदेश अध्यक्ष