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SBI का करोड़ों में होने वाला लेनदेन सिमटकर हजारों में पहुंचा

Thu, 15 Dec 2016 03:40 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बागेश्वर
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एसबीआई - फोटो : file photo
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नोटबंदी से पहले रोज करोड़ों का लेनदेन करने वाले एसबीआई की तिजोरियां पिछले एक महीने से खाली पड़ी हैं। बाजार में गई करेंसी वापस न के बराबर आ रही है।
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इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक माह में 60 करोड़ रुपए खाताधारकों में बांटने वाले बागेश्वर के एसबीआई के पास एक करोड़ रुपया भी वापस नहीं आया है। एसबीआई के अलावा अन्य बैंकों की स्थिति बेहतर है।

एसबीआई में प्रतिदिन करोड़ों का लेनदेन होता है। रिजर्व बैंक से मिलने वाली करेंसी के अलावा बैंक बाजार से आने वाली रकम पर भी निर्भर रहता है, लेकिन नोटबंदी के बाद बैंक से मिलने वाली नई करेंसी धीरे-धीरे लोगों की जेबों में भले ही आ गई हो लेकिन वापसी नहीं होने से बैंक की तिजोरियां खाली पड़ी हैं।
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खनन व अन्य बड़े व्यवसाय से संबंधित चालान नहीं लगने से बैंक के पास पैसा नहीं आ रहा है। रोज करीब 60 लाख से एक करोड़ तक का लेनदेन करने वाले बागेश्वर के एसबीआई का लेनदेन हजारों में सिमट गया है।
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बैंक ने बांटे 60 करोड़ पर वापस एक करोड़ भी नहीं

एसबीआई - फोटो : अमर उजाला
बैंक के मुख्य प्रबंधक रमेश पतियाल ने बताया कि नोटबंदी से पहले साधारण जमा के अलावा लाखों में चालान की रकम जमा होती थी। परंतु अब खनन, पेट्रोल  सहित अन्य चालान भी सिमट गए हैं।

बैंक अभी तक 60 करोड़ से अधिक की रकम बांट चुका है लेकिन बैंक को एक करोड़ रुपए भी वापस नहीं मिला है। सीमित मात्रा में लगने वाले चालान और जो मजदूर अपनी  कमाई घरों को भेजते हैं उन्हीं का पैसा बैंक में आ रहा है।

डेली कलेक्शन से काम चला रहे कई बैंक 
बागेश्वर। एसबीआई के अलावा अन्य छोटे बैंक भी करेंसी के संकट से जूझ तो रहे हैं लेकिन इन बैंकों में जितना पैसा बाहर जा रहा है उसी के अनुसार पैसा आ भी रहा है। बैंकों में डेली कलेक्शन बड़ी राहत दे रहा है। नैनीताल बैंक, अल्मोड़ा अर्बन सहित अन्य बैंकों में बाजार से डेली कलेक्शन के रूप में दो से आठ लाख रुपए तक आते हैं। ऐसे में इन बैंकों का लेनदेन इसी से चल रहा है।
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