नोटबंदी से पहले रोज करोड़ों का लेनदेन करने वाले एसबीआई की तिजोरियां पिछले एक महीने से खाली पड़ी हैं। बाजार में गई करेंसी वापस न के बराबर आ रही है।
इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक माह में 60 करोड़ रुपए खाताधारकों में बांटने वाले बागेश्वर के एसबीआई के पास एक करोड़ रुपया भी वापस नहीं आया है। एसबीआई के अलावा अन्य बैंकों की स्थिति बेहतर है।
एसबीआई में प्रतिदिन करोड़ों का लेनदेन होता है। रिजर्व बैंक से मिलने वाली करेंसी के अलावा बैंक बाजार से आने वाली रकम पर भी निर्भर रहता है, लेकिन नोटबंदी के बाद बैंक से मिलने वाली नई करेंसी धीरे-धीरे लोगों की जेबों में भले ही आ गई हो लेकिन वापसी नहीं होने से बैंक की तिजोरियां खाली पड़ी हैं।
खनन व अन्य बड़े व्यवसाय से संबंधित चालान नहीं लगने से बैंक के पास पैसा नहीं आ रहा है। रोज करीब 60 लाख से एक करोड़ तक का लेनदेन करने वाले बागेश्वर के एसबीआई का लेनदेन हजारों में सिमट गया है।