देहरादून। मसालों की खरीदारी के लिए प्रसिद्ध हनुमान चौक बाजार में समस्याओं का अंबार है। बाजार में न पार्किंग है और न ही शौचालय। सड़कों के किनारे खड़े वाहनों से हर समय जाम लगा रहता है। इसके कारण व्यापारियों के साथ ही ग्राहकों को परेशानियों से जूझना पड़ता है।
देहरादून के हनुमान चौक बाजार का इतिहास करीब 135 साल पुराना है। इस बाजार को देहरादून का हृदय कहा जाता है। बाजार में 1890 में हनुमान मंदिर का निर्माण हुआ। इसी मंदिर के नाम पर ही बाजार का भी नाम पड़ा। पहले यहां गिनी-चुनी दुकानें ही हुआ करती थीं। देखते ही देखते अब यह बाजार व्यवसाय का बड़ा केंद्र बन गया। बाजार अपनी किराना मंडी, मसाले और घरेलू सामान के लिए प्रसिद्ध है। रोजाना बड़ी संख्या में लोग यहां खरीदारी के लिए पहुंचते हैं।
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समय के साथ बाजार का तो विस्तार हुआ लेकिन सुविधाओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इससे बाजार में अव्यवस्था रहती है। बाजार में न पार्किंग है न ही दूसरी कोई सुविधा। व्यापारियों का कहना है की एक शौचालय तक यहां नहीं है। इसके कारण ग्राहकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हनुमान चौक से लगते बाबू गंज बाजार में बड़े वाहनों के आने जाने का समय तय नहीं है। इसके कारण हर समय जाम लगा रहता है।
तंग गलियों में खड़े होते हैं वाहन : हनुमान चौक बाजार में झंडा बाजार, पलटन बाजार समेत अन्य बाजार की गलियां आकर मिलती हैं। मंदिर के पास ही बाजार में कई जगह सड़कों पर ही वाहन खड़े होते हैं। तंग गलियों तक में वाहन खड़े किए जाते है। इसके कारण हर समय जाम लगा रहता है। बड़े वाहनों के लगातार आने-जाने से भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हनुमान चौक पर यातायात का दबाव इतना अधिक है कि पैदल चलना भी दूभर हो जाता है। संवाद