नाबालिग लड़की का अपहरण कर दुष्कर्म करने के मामले में अदालत ने दोष साबित होने पर आरोपी को सात साल का कठोर कारावास और 15 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है।
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अर्थदंड में से 10 हजार पीड़िता को प्रतिकर के रूप में देने होंगे। जुर्माना अदा नहीं करने पर आरोपी को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। इसी मामले में तीन युवकों को दोषमुक्त कर दिया गया।
कोर्ट के मुताबिक 12 जून, 2012 को घर के पास शौच के लिए निकली एक नाबालिग लड़की संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। परिजनों ने 16 जून को चार युवकों को नामजद करते हुए नाबालिग के अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था।
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छानबीन में जुटी पुलिस ने 11 नवंबर को नाबालिग को एक युवक के कब्जे से बरामद किया। युवक नाबालिग को भोपाल ले गया और वहां उसके साथ जबरन दुराचार किया। विवेचना के बाद पुलिस ने 15 जनवरी, 2013 को न्यायालय में आरोपपत्र प्रस्तुत किया।
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शुक्रवार को मामले की सुनवाई प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरके खुल्बे की अदालत में हुई। अदालत ने दुराचार का आरोप साबित होने पर आरोपी युवक मिंटू को सात साल का कारावास और 15 हजार रुपए जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। जबकि अपहरण की साजिश के आरोप में शामिल तीन युवकों को बरी कर दिया।
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