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Dehradun News: महोत्सव में हुआ साहित्यिक विमर्श और लोकसंगीत का संगम

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दून पुस्तक महोत्सव के दूसरे दिन साहित्यिक विमर्श और लोकसंगीत का संगम देखने को मिला। परेड ग्राउंड में चल रहे महोत्सव में रविवार को साहित्य, समाज और ज्ञान के विविध आयामों पर चर्चा की गई। जबकि सांस्कृतिक संध्या में लोक गायक गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी ने लाइव प्रस्तुति से समां बांध दिया।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि एनबीटी विश्वभर में पुस्तकों के माध्यम से ज्ञान का प्रसार कर रहा है। उन्होंने कहा कि जो सोचता है, वही लेखक बनता है। जब आप लिखना शुरू करते हैं तो आप स्वतः लेखक बन जाते हैं। शब्द ही ब्रह्मांड की सबसे बड़ी शक्ति हैं। एनबीटी के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे ने साहित्य की परिभाषा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज के हित की बात जिसमें हो, वही साहित्य है। शब्दों और वाक्यों की सृजनात्मक अभिव्यक्ति ही साहित्य का वास्तविक स्वरूप है। उन्होंने उत्तराखंड की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का उल्लेख करते हुए सुमित्रानंदन पंत और शैलेश मटियानी जैसे साहित्यकारों को याद किया।



पद्मश्री डॉ. आरके जैन ने कहा कि पुस्तकों से प्राप्त ज्ञान का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने वैज्ञानिक माइकल फैराडे के जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि पढ़ने की आदत व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों से उबारकर ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है। वहीं, पहले सत्र में लेखक व खोजी पत्रकार जुपिंदर सिंह ने अपनी पुस्तक भगत सिंह की पिस्तौल की खोज पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने शोध प्रक्रिया की चुनौतियों को साझा करते हुए कहा कि किसी भी शोध की शुरुआत अभिलेखागार से होती है।
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उन्होंने भगत सिंह से जुड़े कई रोचक प्रसंगों को साझा किया और युवा पत्रकारों को ऐतिहासिक समझ विकसित करने की सलाह दी। दूसरे सत्र में लेखिका, पटकथा लेखक और स्तंभकार अद्वैता काला ने बिटवीन द लाइंस एंड लेंस विषय पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने स्वतंत्र भारत में एक महिला के दृष्टिकोण, लेखन यात्रा और किताबों से पटकथा लेखन तक के सफर पर विस्तार से चर्चा की।



वहीं, देर शाम को आयोजित हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम में लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी ने अपने लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी गायकी में पहाड़ की संस्कृति, परंपरा और सामाजिक सरोकारों की झलक देखने को मिली।
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