देहरादून। राजधानी के डीएवी, डीबीएस, एसजीआरआर व एमकेपी आदि अशासकीय कॉलेजों में शिक्षक व कर्मचारियों को दो महीने से वेतन का भुगतान नहीं हुआ है। उच्च शिक्षा निदेशालय, कोषागार स्तर पर प्रक्रिया लंबित होने का हवाला दे रहा है, लेकिन शिक्षक संगठन इसे कॉलेजों द्वारा आंदोलन में शामिल शिक्षक-कर्मचारियों की सूची न सौंपना बता रहे हैं।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि दिसंबर 2020 व बीती जनवरी का वेतन अभी तक नहीं दिया गया है। निदेशालय कह रहा है कि ग्रांट जारी की जा चुकी है, कोषागार स्तर पर प्रक्रिया लंबित है। एचएनबी गढ़वाल विवि-महाविद्यालय शिक्षक संघ के महासचिव डॉ. डीके त्यागी ने कहा कि सांकेतिक विरोध दर्ज करना हर नागरिक की तरह शिक्षकों का भी अधिकार है। शिक्षकों ने रोजाना महज आधे घंटे के लिए सांकेतिक विरोध दर्ज कराया था। छात्रों की कक्षाएं प्रभावित होने नहीं दी। मौजूदा हालातों को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि बदले की भावना से वेतन रोका गया है। कई शिक्षक बैंक लोन की किश्त नहीं दे पा रहे हैं। इससे शिक्षक व कर्मचारी मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं।
कॉलेजों ने नामों की सूची देने में जताई असमर्थता
बता दें, अंब्रेला एक्ट के खिलाफ देहरादून समेत प्रदेशभर के अशासकीय कॉलेजों में शिक्षक व कर्मचारियों ने पिछले साल नवंबर व दिसंबर महीने में विरोध दर्ज कराने के लिए सुबह सांकेतिक धरना दिया था। शिक्षक व कर्मचारियों ने राज्य विवि अधिनियम से अनुदान का प्रावधान हटाने को लेकर विरोध जताया था। दिसंबर अंत में शिक्षक संगठनों ने सचिवालय कूच भी किया था। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए उच्च शिक्षा निदेशक ने 24 दिसंबर को कॉलेजों के प्राचार्य एवं प्रबंधकों को पत्र भेजा था। जिसमें आंदोलन में शामिल शिक्षक व कर्मचारियों को चिह्नित कर सूची सौंपने का आदेश दिया था। उनके वेतन रोकने की बात भी कही थी। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने शिक्षकों का स्पष्टीकरण मांगकर निदेशक को भेज दिया। कॉलेजों ने शिक्षकों के नामों की सूची उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई। इसके पीछ तर्क दिया कि शिक्षकों से नाम मांगे गए, लेकिन उन्होंने जानकारी नहीं दी है।