देहरादून-पांवटा राष्ट्रीय राजमार्ग से लेकर विकासनगर से होकर गुजरने वाले दिल्ली-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनाए गए स्पीड ब्रेकर वाहन चालकों के लिए मुुसीबत बने हुए हैं। वाहनों के लिए थोड़ी-थोड़ी दूरी पर सामने आने वाले स्पीड ब्रेकरों से आए दिन दुर्घटनाओं की स्थिति भी पैदा हो रही है।
नियमानुसार राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्पीड ब्रेकर नहीं बनाए जाते हैं, लेकिन देहरादून-पांवटा व दिल्ली-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर जगह-जगह बने स्पीड ब्रेकर न सिर्फ नियम विरुद्ध हैं बल्कि इनकी वजह से वाहन चालकों को गंभीर स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। देहरादून-पांवटा राष्ट्रीय राजमार्ग पर देहरादून के प्रेमनगर से लेकर झाझरा, धूलकोट, सेलाकुई, रामपुर, सहसपुर, ढाकी तक कई स्पीड ब्रेकर वाहन चालकों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। इसके अलावा दिल्ली-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर तिमली, धर्मावाला, तहसील तिराहा आदि में बनाए गए स्पीड ब्रेकर परेशानी बने हुए हैं।
ह्युमन राइट एंड आरटीआई एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद शर्मा का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्पीड ब्रेकर नहीं बनाए जाने के संबंध में उत्तराखंड शासन के स्पष्ट आदेश हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित नियमों में भी ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। बावजूद इसके दोनों राष्ट्रीय राजमार्गों पर बहुतायत में मौजूद स्पीड ब्रेकर वाहनों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ा रहे हैं।
दुर्घटना का खतरा
राष्ट्रीय राजमार्ग का नाम आते ही वाहनों की स्पीड स्वत: ही बढ़ जाती है। यही कारण है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्पीड ब्रेकर आने से तेज स्पीड से चलने वाले वाहनों का बैलेंस बिगड़ जाता है। हरबर्टपुर निवासी अरुण कुमार, सहसपुर निवासी डॉ. इकबाल, रामपुर निवासी अरशद अली का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर हर दस या बारह किलोमीटर पर आने वाले अवरोध वाहन चालकों के लिए समस्या पैदा करते हैं। रात के समय इस प्रकार के ब्रेकर दुर्घटना का कारण भी बन सकते हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर गति अवरोधक नियमानुसार गलत है लेकिन सुरक्षा की दृष्टिकोण से ठीक है। राजमार्ग पर जिन स्थानों पर दूसरे प्रमुख मार्ग जुड़ते हें या फिर स्कूल-कॉलेज या अस्पताल आदि स्थित हैं, वहीं पर स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं। विभाग का प्रयास यही है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर दुर्घटना नहीं घट सके। इसके अलावा जो स्थान सुरक्षा की दृष्टि से ठीक हैं, उनसे पूर्व में ब्रेकर हटाए भी गए हैं। - मनोज राठौर, सहायक अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण खंड