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Dehradun News: तुंगनाथ के 22 अप्रैल व मद्महेश्वर मंदिर के कपाट 21 मई को खुलेंगे

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- ऊखीमठ और मक्कूमठ में पंचांग गणना के बाद कपाट खुलने की तिथि हुई घोषित
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- 17 मई को मद्महेश्वर की भोग मूर्ति को गर्भगृह से निकालकर सभामंडप में करेंगे विराजमान
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊखीमठ। द्वितीय केदार मद्महेश्वर मंदिर के कपाट 21 मई और तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट 22 अप्रैल को ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए जाएंगे। बैसाखी पर मंगलवार को ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ व मर्कटेश्वर मंदिर मक्कूमठ में पंचांग गणना के बाद कपाट खुलने की तिथि घोषित की गई।
पंचकेदार गद्दी स्थल ओंकारेश्वर में मंदिर समिति के वेदपाठी आचार्य यशोधर मैठाणी, विश्व मोहन जमलोकी व नवीन मैठाणी ने पंचांग गणना कर कपाट खोलने की तिथि घोषित की। उन्होंने बताया कि 17 मई को मद्महेश्वर की भोग मूर्ति को गर्भगृह से निकालकर सभामंडप में विराजमान किया जाएगा और गांव के लोग नए अनाज का भोग लगाएंगे। 19 मई को मद्महेश्वर की डोली ओंकारेश्वर मंदिर से प्रस्थान कर राकेश्वरी मंदिर रांसी पहुंचेगी। 20 मई को गौंडार गांव तथा 21 मई को गौंडार गांव से प्रस्थान कर मद्महेश्वर मंदिर पहुंचेगी और पूर्वाह्न 11 बजे मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे। उधर तुंगनाथ मंदिर के कपाट खोलने की तिथि शीतकालीन गद्दी स्थल मर्कटेश्वर मंदिर मक्कूमठ से तय की गई। मंदिर के मठापति रामप्रसाद मैठाणी एवं पंच पुरोहितों की मौजूदगी में आचार्य भारत भूषण मैठाणी ने तिथि घोषित की। उन्होंने बताया कि 20 अप्रैल को तुंगनाथ की डोली मक्कूमठ से तुंगनाथ मंदिर के लिए प्रस्थान करेगी और रात्रि विश्राम के लिए भूतनाथ मंदिर पहुंचेंगी। 21 मई को चोपता एवं 22 मई को चोपता से तुंगनाथ मंदिर पहुंचेगी। इसके बाद पूर्वाह्न 11 बजे कपाट खोल दिए जाएंगे। इस अवसर पर मद्महेश्वर मंदिर के लिए नियुक्त मुख्य पुजारी शिवशंकर लिंग, पुजारी वागेश लिंग, शिव लिंग, गंगाधर लिंग, मंदिर समिति के डीएस भुजवाण, विदिश शैव, देवी प्रसाद तिवारी, व्यापार संघ अध्यक्ष राजीव भट्ट, शिव सिंह रावत, पंच कारबारियान के अध्यक्ष शिवानंद सिंह आदि मौजूद रहे। वहीं मक्कूमठ में ग्राम प्रधान सुनीता मैठाणी, प्रधान पाव जगपुड़ा विनोद नेगी, क्षेत्र पंचायत सदस्य आशीष चौहान और पंच पुरोहित अध्यक्ष रेवाधर मैठाणी आदि मौजूद थे।
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इनसेट
पुष्प रथ पर विराजमान हुए मद्महेश्वर
बैसाखी पर भगवान मद्महेश्वर पुष्परथ पर विराजमान हुए और ओंकारेश्वर मंदिर की परिक्रमा कर भक्तों को आशीर्वाद दिया। पूर्व से चली आ रही परंपरा के अनुसार मंगलवार को बैसाखी पर सुबह साढ़े आठ बजे भगवान की भोग मूर्तियों को गर्भगृह से सभामंडप में विराजमान किया गया। मुख्य पुजारी शिव शंकर लिंग ने सभामंडप में भोग मूर्तियों का अभिषेक पूजन कर भोग लगाया। दोपहर ढाई बजे मद्महेश्वर की भोग मूर्तियों को पुष्परथ पर विराजमान किया गया और मंदिर की परिक्रमा के बाद रथ के पुष्पों को प्रसाद रूप में वितरित किया गया। इस अवसर पर स्थानीय हक-हकूकधारियों के साथ पूर्व विधायक मनोज रावत, पूर्व प्रमुख लक्ष्मी प्रसाद भट्ट,मदन सिंह पंवार, विशंभर पंवार, दीपक पंवार शिव सिंह पंवार आदि मौजूद थे।
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