उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन बुधवार को हो गया। इस दौरान जस्टिस रवींद्र मैठाणी कार्यशाला में ऑनलाइन जुड़े। उन्होंने बाल आयोग की ओर से किए जा रहे कार्यों की सराहना की और कहा कि बाल हित के लिए ग्रामीण लेवल पर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी का गठन किया जाना चाहिए। इस विषय पर काम करने की जरूरत है।
तीन दिवसीय कार्यशाला में ‘इमर्जिंग पॉलिसी शिफ्ट्स फॉर स्ट्रेंथनिंग चाइल्ड राइट्स’ विषय पर बात हुई। इसमें 18 राज्यों के बाल आयोग के अध्यक्ष भी जुड़े थे। समापन सत्र में फॉरगिवनेश फाउंडेशन के मनोवैज्ञानिक पवन शर्मा ने बच्चों व किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर बात की। उन्होंने कहा कि माता पिता को बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उत्तराखंड बाल आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि किशोरावस्था और उस समय होने वाले परिवर्तन के समय बच्चों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बाल आयोग बच्चों के हित के लिए हमेशा आगे रहता है। कोविड महामारी के बाद राजस्थान बाल अधिकार संरक्षण आयोग के बाद उत्तराखंड दूसरा ऐसा राज्य है जो राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला का सफल आयोजन करा पाया है। आयोग के सदस्य अजय वर्मा ने कहा कि आयोग विभिन्न जनपदों में कार्यशाला का आयोजन कर बाल हितों के लिए लोगों को जागरूक करता रहता है। आयोग की सदस्य रेखा रौतेला ने बाल हितों के विभिन्न मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर पर गहन चर्चा की।
Iसंस्थागत पुनर्वास की समस्याओं पर होगी बातI
बाल आयोग के सदस्य विनोद कपरवाण ने साइबर क्राइम, नशा, शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य व बच्चों के अधिकार, दत्तक ग्रहण प्रकिया, संरक्षण और देखभाल की आवश्यकता पर बात की। उन्होंने कहा कि बच्चों के संस्थागत पुनर्वास के लिए आने वाली समस्या निवारण किया जाएगा। चंडीगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष शिप्रा बंसल ने अपनी कविता का मनमोहा। कार्यशाला में एडिफाई विद्यालय के छात्र-छात्राओं की सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ समापन किया गया।