लाखों की आबादी के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी लेने वाला मसूरी का उपजिलाचिकित्सालय खुद ही बीमार पड़ गया है। यहां चिकित्सकों की भारी कमी के कारण मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि कई चिकित्सकों के अस्पताल में कोई विकल्प ही नहीं हैं, ऐसे में मरीजों को उपचार के लिए देहरादून की दौड़ लगानी पड़ रही है। इसके अलावा जिनका यहां उपचार हो भी रहा है, उनकी जिंदगी की डोर वार्ड ब्वॉय के हाथों में सौंप दी गई है। यहां वार्ड ब्वॉय मरीजों को इंजेक्शन लगा रहे हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि अस्पताल प्रशासन और शासन यहां मरीजों के स्वास्थ्य को लेकर कितना गंभीर है।
उप जिलाचिकित्सालय मसूरी पर क्षेत्र की लाखों की आबादी के साथ ही धनोल्टी विधानसभा के सैकड़ों गांव और कैंपटी, नैनबाग, थत्यूड़, सुवाखोली सहित आसपास की लाखों की आबादी निर्भर है। यहां प्रतिदिन करीब 250 मरीज उपचार के लिए आते हैं। आसपास में दूसरा कोई बड़ा सरकारी अस्पताल न होने के कारण उक्त अस्पताल की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। लेकिन, चिंता की बात यह है कि इस अस्पताल में मरीजों के उपचार के लिए चिकित्सकों की भारी कमी हो गई है। यहां चिकित्सकों के 29 पद सृजित हैं। जिनमें से पहले ही चार पद रिक्त चल रहे थे। अब बचे हुए 25 चिकित्सकों में से पांच को व्यवस्था पर डोईवाला भेज दिया गया है। दो चिकित्सक ट्रेनिंग पर गए हुए हैं। चार चिकित्सक उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए चले गए हैं। साथ ही दो चिकित्सक आगामी 15 सितंबर से चारधाम यात्रा ड्यूटी पर जा रहे हैं। ऐसे में अब यहां मात्र 12 चिकित्सक ही रह गए हैं, जिन पर लाखों की आबादी के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी आ गई है। इस पर भी लापरवाही यह है कि वार्ड ब्वॉय के भरोसे मरीजों को छोड़ दिया गया है। जिससे वार्ड ब्वॉय ही मरीजों को इंजेक्शन लगाने के साथ उनका उपचार कर रहे हैं। सोमवार को भी वार्ड ब्वॉय एक मरीज को इंजेक्शन लगाता हुआ पाया गया। जबकि नियमानुसार चिकित्सक या फार्मासिस्ट के अलावा विशेषज्ञ नर्स ही मरीजों को इंजेक्शन लगा सकती है। शासन और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण लोगों में आक्रोश बढ़ने लगा है।
यह चिकित्सक नहीं हैं अस्पताल में
बालरोग विशेषज्ञ डॉ. मीता श्रीवास्तव, फिजीशियन डॉ. स्वाति, सर्जन डॉ. मोहित, महिला चिकित्सक डॉ. दिशा, महिला चिकित्सक डॉ. भारती को मसूरी से व्यवस्था पर डोईवाला भेज दिया गया है। ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. आलोक कोरोनेशन अस्पताल और चिकित्साधिकारी डॉ. मनीषा को स्वास्थ्य महानिदेशालय में व्यवस्था पर तैनात किया गया है। वहीं, डॉ. मेघा, डॉ. अनुष्का, डॉ राधिका, डॉ. गौरव उच्चशिक्षा ग्रहण करने के लिए चले गए हैं। अस्पताल सुत्रों ने बताया कि डॉ. अभिषेक और हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद के 15 सितंबर से चार धाम यात्रा ड्यूटी पर जाने की तैयारी है। डॉ. वीरेंद्र पांगती और गायनोलॉजिस्ट डॉ. पल्लवी ट्रेनिंग पर चले गए हैं।
ईएनटी और सामान्य सर्जरी के मरीज लौट रहे वापस
अस्पताल प्रशासन अनुपस्थित चिकित्सकों की जगह वैकल्पिक व्यवस्था करने के दावे तो कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि कई मरीजों को उपचार न मिलने के कारण देहरादून की दौड़ लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है। दरअसल, यहां ईएनटी और सामान्य सर्जन का विकल्प नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में इन मरीजों को यहां उपचार न मिलने के कारण वापस लौटना पड़ रहा है। उधर, अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद भी अगर चले जाते हैं तो फिर समस्या और बढ़ने की संभावना है। क्योंकि उनका भी अस्पताल में कोई विकल्प नहीं है।
सफाई व्यवस्था भी भगवान भरोसे
अस्पताल में सफाई कर्मियों की भी भारी कमी चल रही है। ऐसे में यहां सफाई व्यवस्था भगवान भरोसे है। आए दिन यहां अस्पताल के फर्श पर गंदगी पसरी रहती है। जिससे मरीजों में संक्रमण का खतरा बढ़ता जा रहा है। इस मामले में अस्पताल प्रशासन भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
अस्पताल में चिकित्सकों की कमी चल रही है। हालांकि, वैकल्पिक तौर पर व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जा रहा है। कुछ चिकित्सक जल्द ही ड्यूटी पर लौट आएंगे, जिससे भी व्यवस्था में सुधार आएगा। मरीजों को कोई परेशानी न हो इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। जहां तक वार्ड ब्वॉय के मरीजों को इंजेक्शन लगाने की बात है तो यह गलत है। इसकी जांच की जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. यतेंद्र सिंह, सीएमएस, उप जिलाचिकित्सालय लंढौर