चीन युद्ध से सबक लेकर 1963 में देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी से जो बैच पासआउट हुआ वह सेना के इतिहास में सबसे बड़ा है।
आईएमए में गोल्डन जुबली समारोह
एक साथ सेना को 1448 यंग आफिसर्स मिले। अब यह अफसर 18 दिसंबर को एक बार फिर आईएमए में पहुंच रहे हैं। भारतीय सैन्य अकादमी से 27 सितंबर 1963 को पासआउट हुए जेंटलमैन कैडेट का आईएमए में गोल्डन जुबली समारोह है।
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इस कोर्स से पासआउट हुए रिटायर ब्रिगेडियर केजी बहल ने बताया कि गोल्डन जुबली समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण है कि सबसे बड़ा बैच दोबारा जुटेगा। भारतीय सैन्य अकादमी की प्रत्येक पीओपी के बाद पुराने कोर्स की रियूनियन की परंपरा है, जिसके तहत हमारा कोर्स पहुंचेगा।
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समारोह के संयोजक रिटायर कर्नल केएस मान ने बताया कि 18 से 20 दिसंबर तक आईएमए में समारोह आयोजित किया जाएगा। कर्नल मान ने बताया कि यह एक बड़ी चुनौती है कि इतने बड़े बैच के सभी अफसरों का पता लगाया जाए, हम लगातार कोशिश कर रहे हैं। इस अवसर रिटायर लेफ्टिनेंट कर्नल आरपी जयरथ और सीपी ओबराय मौजूद रहे।
डेढ़ बरस का कोर्स 6 माह में
चीन युद्ध से बने आपात जैसे हालात को देखते हुए आईएमए में इमरजेंसी कोर्स शुरू हुए। इसके लिए युवाओं का चयन में कुछ रियायतें दी गई। अन्य सरकार महकमों में तैनात युवा कर्मियों को तरजीह मिली। लगभग 18 सौ कैडेट इमरजेंसी कोर्स के थे। इनकी ट्रेनिंग मात्र 6 माह की करवाई गई।
बाद में बने आईएएस आईपीएस
इमरजेंसी कोर्स होने के चलते पांच वर्ष की सेवा के बाद युवाओं को दोबारा चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, जिसमें एक तिहाई ही नियमित सेवा में आ सके। कर्नल मान ने बताया कि सेना छोड़ने वाले अधिकारी बाद में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस सहित कई अन्य सेवाओं में शामिल हुए। अन्य सेवाओं में गए अधिकारी भी रियूनियन में पहुंचेंगे।
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