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तीज पर भी आपदा की मार

Fri, 02 Aug 2013 09:39 PM IST
देहरादून/नलिनी
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उत्तराखंड में बीते महीने आई आपदा का असर तीज-त्योहारों पर भी नजर आने लगा है। बाजार तो त्योहारों के लिए सजे हुए हैं लेकिन खरीददार कम हो गए हैं।
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हरियाली तीज की तैयारियों में इन दिनों शहर की महिलाएं जुटी हैं। बाजार में भी इसके लिए खास तैयारी है। नई साड़ियों के साथ ही मेहंदी के कूपन भी निकाले गए हैं। हालांकि इस बार बाजार में छाई मंदी भी साफ नजर आ रही है। नौ अगस्त को हरियाली तीज का पर्व है।

तीन बुराइयों को त्यागने का पर्वः
तीज को तीन बुराइयों को त्यागने का पर्व माना जाता है। ये हैं छल-कपट, झूठ और परनिंदा। इस पर्व को लेकर मान्यता है कि पार्वती जी ने अपने पति भोले-शंकर के लिए यह व्रत किया था।
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यह भी माना जाता है कि जब सती को उनके पिता ने घर नहीं बुलाया तो उन्होंने एक ऐसे पर्व की शुरूआत की, जिसमें बेटियों को मायके वाले बुलाएं और तब से ही यह पर्व मनाया जाता है।

श्रावण शुक्ल तृतीया को ही कजली तीज का लोक पर्व मनाया जाता है। इस मौके पर बेटियों को मायके बुलाया जाता है। मायके वाले बेटियों के ससुराल सिंधारा (साड़ी, बिंदी, मिठाई आदि) भी भिजवाते हैं।

बाजार में मंदीः
आपदा को लेकर बाजार में छाई मंदी तीज के पर्व पर साफ दिखाई दे रही है। स्थानीय महिलाएं भले ही तीज की तैयारियों में जुटी हैं और बाजार में भी नए आइटम आएं हैं, फिर भी बाजार सूना है। आपदा के चलते बाजार में बाहरी पर्यटक भी नहीं हैं।

ऐसे में मेहंदी वालों के पास भी भीड़ नजर नहीं आ रही है। वहीं कई लोग ऐसे भी हैं जो पर्व के मौके पर गढ़वाल में अपने परिवार की महिलाओं के लिए साड़ी आदि सामान खरीदकर ले जाते हैं, वो भी इस बार खरीदारी करने नहीं निकले।

इनकी भी सुनिएः
मेहंदी के लिए विशेष कूपन तो निकाले गए हैं लेकिन इस बार हर साल जैसा क्रेज नहीं दिखाई दे रहा है। पर्व है तो महिलाएं मेहंदी लगवाने तो आएंगी ही लेकिन बाहरी पर्यटकों से जो इस समय बाजार गुलजार रहता था और वे सभी यहां आकर मेहंदी लगवाकर जाते थे, ऐसा कुछ भी इस बार नहीं है। मेहंदी का बाजार पहाड़ पर आई आपदा के बाद से सूना है।
- मनोज (मनोज मेहंदी आर्ट)

तीज पर्व के लिए जयपुरी, लहरिया और प्रिंटेड साड़ियां लाई गई हैं, लेकिन खरीदार बेहद कम हैं। इसकी वजह साफ है कि इस पर्व के मौके पर गढ़वाल में रहने वाले लोग जब घर छुट्टी जाते थे तो साड़ी आदि सामान खरीदकर ले जाते थे। लेकिन इस बार एक भी ऐसा ग्राहक नहीं आया है। साड़ियों की बिक्री काफी धीमी है।
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- मीनू जैन, (जैन-टैक्सटाइल साड़ी शॉप)

आसमान में घुमड़ती काली घटाओं के कारण इस पर्व को कजली तीज अथवा हरियाली के कारण हरियाली तीज के नाम से पुकारा जाता है। प्रकृति एवं मानव हृदय की भव्य भावना की अभिव्यक्ति तीज पर्व में निहित है।
- आचार्य भरत राम तिवारी, उपाध्यक्ष उत्तराखंड विद्वत सभा
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