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यहां अधिकारी खुद होना चाहते हैं दंडित

Fri, 02 Aug 2013 05:38 PM IST
देहरादून/प्रेम प्रताप सिंह
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सरकार के मुलाजिमों को अपनी कारगुजारियों की जानकारी देने से बढ़िया मामूली सा जुर्माना देना ज्यादा भा रहा है। तभी तो उत्तराखंड में स्थित राजाजी राष्ट्रीय पार्क के उपनिदेशक ने जानकारी के दंडित होना ज्यादा पसंद किया।
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राजाजी राष्ट्रीय पार्क में लैंटाना उन्मूलन के लिए तय बजट और खर्च की गई राशि के बारे में जानकारी न देना और निरीक्षण से इनकार करना पार्क के उपनिदेशक एचके सिंह पर भारी पड़ गया।

मुख्य सूचना आयुक्त एनएस नपच्याल ने सिंह पर 25 हजार का जुर्माना लगाया है। आयोग के आदेश के मुताबिक यह राशि उपनिदेशक के दो माह के वेतन से काटकर कोषागार में जमा की जाएगी।
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आरटीआई के तहत मांगी थी जानकारी
पीपुल फॉर एनिमल (पीएफए) की गौरी मौलेखी ने आरटीआई 2005 के तहत राजाजी राष्ट्रीय पार्क में लैंटाना उन्मूलन से संबंधित चार बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी।

पार्क में उन्मूलन किए गए स्थानों का निरीक्षण करने का अनुरोध भी किया था, लेकिन पार्क के सूचना अधिकारी/ उप निदेशक एचके सिंह ने ऐसा करने से मना कर दिया। इसके बाद मौलेखी ने सूचना आयोग में अपील की थी।

आयोग ने सिंह को नोटिस दिया, लेकिन इसका संतोषजनक जवाब नहीं मिला। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य सूचना आयुक्त ने 18 जुलाई को उप निदेशक पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया।

इन्होंने लगाए आरोपः
लैंटाना उन्मूलन के नाम पर पूरे प्रदेश में जबर्दस्त भ्रष्टाचार हो रहा है। इसीलिए निरीक्षण से मना किया गया। विभाग ऐसी जगह बजट देता है, जहां लैंटाना होती ही नहीं। मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
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-गौरी मौलेखी, सदस्य सचिव पीएफए उत्तराखंड
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