विकासनगर के शंकरपुर में गुलदार के हमले में हुई मासूम की मौत ने वन्यजीव विशेषज्ञों को भी चौकन्ना कर दिया है। हालांकि, उनका कहना है कि गुलदार टारगेट किलिंग करने वाला प्राणी नहीं है। इस मामले में हालात गुलदार के अनुकूल थे। बहुत मुमकिन है कि उसने मृतक के परिवार के घर के पास अपना रास्ता बना लिया हो। इसलिए टारगेट किलिंग जैसी बातें चल रही हैं।
जिस घर के आंगन से गुलदार बच्चे को ले गया, यह जंगल के किनारे है। वहां बड़ी-बड़ी झाड़ियां हैं। वन्यजीवों के व्यवहार पर नजर रखने वाले वन अधिकारी आकाश वर्मा का कहना है कि ये झाड़ियां गुलदार के छुपने के लिए बेहतर वातावरण बनाती हैं।
आसपास दूसरे घर न होने से गुलदार के लिए इस परिवार के किसी सदस्य पर हमला करना आसान था। एक तरह से यह घर गुलदार के रास्ते में आता है। जिस तरह से इस परिवार के लोगों ने गुलदार को पहले भी देखा है, उसी तरह से गुलदार ने भी इनको देख रखा है। इसे संयोग ही कहा जा सकता है कि गुलदार ने बच्चे पर दूसरी बार हमला किया और इस बार वह कामयाब रहा।
आकाश वर्मा कहते हैं कि अभिलेखों में अभी तक इसके पुख्ता प्रमाण नहीं हैं कि गुलदार टारगेट किलिंग करता है। प्रमाणित तौर पर साइबेरिया में इस तरह की एक घटना दर्ज है। वहां टाइगर ने टारगेट किलिंग की थी। जबकि जापान में मिथक कथाओं में इस तरह की घटना दर्ज हैं।