ओमिक्रॉन से घातक है डेल्टा
अप्रैल 2021 में आई कोविड की दूसरी लहर में ज्यादातर मरीजों में डेल्टा वैरिएंट मिला था। इसने भारत में जमकर कहर बरपाया था। मरीजों में फेफड़ों का इन्फेक्शन बहुत ज्यादा था। इस वजह से ऑक्सीजन की कमी भी होती गई। इसके बाद डेल्टा वैरिएंट का प्रभाव धीमा पड़ गया। जनवरी 2022 में आई कोविड की तीसरी लहर में ओमिक्रॉन ने लोगों को परेशान किया। हालांकि, यह अधिक घातक नहीं था। करीब 99 फीसदी मरीज होम आइसोलेशन में ठीक हो गए थे।
देहरादून के कोरोना मरीजों की जीनोम सीक्वेंसिंग दून मेडिकल कॉलेज के लैब में होती है। मरीजों की स्थिति अगर गंभीर लगती है तो जीनोम सीक्वेंसिंग कराई जाएगी।
- डॉ. संजय जैन, सीएमओ, देहरादून