मादा गुलदार जंगल से भटककर आबादी क्षेत्र में पहुंच गई थी
चार साल से कम उम्र के गुलदार अक्सर रास्ते भटक जाते हैं। जंगल से आबादी क्षेत्र में आने पर ऐसे गुलदार को वापसी का रास्ता ढूंढने में उलझन रहती है। वन विभाग के एसडीओ डॉ. उदयनंद गौड़ ने बताया कि बालावाला में भी करीब डेढ़ साल की मादा गुलदार जंगल से भटककर आबादी क्षेत्र में पहुंच गई थी।
संभवतया जंगल में वापस जाने के लिए ही वह एक से दूसरे गांव के क्षेत्र में भटकती रही। बताया कि गुलदार इंसान पर तभी हमला करता है, जब कोई उसे परेशान करता या छेड़ता है। आमतौर पर कम उम्र का गुलदार ज्यादा हमला करने की स्थिति में नहीं होता।
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यही वजह है यह मादा गुलदार क्षेत्र में जंगली मुर्गे और खरगोश का शिकार कर रही थी। उसने एक छोटे बछड़े को भी शिकार बनाया था। वन अधिकारी राकेश ने बताया कि लगभग चार साल से ऊपर की उम्र के गुलदार में यह समझ विकसित हो जाती है कि वह कहां से आया है। उसे यह पता रहता है कि उसी जगह वापस कहां से होकर जाना है। कुत्ता गुलदार का आसान शिकार होता है। इसके अलावा जंगल में गुलदार अक्सर काकड़, चीतल, घुरड़ आदि को खाता है।