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राजधानी की सड़कों पर ब्लैक स्पॉट दुरुस्त करने को गंभीर नहीं विभाग

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राजधानी की सड़कों पर बने ब्लैक स्पॉट को लंबे समय से दुरुस्त नहीं किया गया है। ऐसे यहां पर 46 स्थान हैं, जहां दुर्घटना में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। इसके अलावा 56 दुर्घटना संभावित स्थल हैं। इन ब्लैक स्पॉट और दुर्घटना संभावित स्थलों को दुरुस्त करने के लिए बैठकों में तो संबंधित विभागों को निर्देशित किया जाता है, लेकिन इसके बाद भी संबंधित विभाग इन निर्देशों को भूल जाते हैं। नतीजतन इन स्थानों पर दुर्घटनाओं का सिलसिला जारी रहता है।
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हरिद्वार बाईपास की पुरानी पुलिस चौकी खतरनाक
यह राजधानी के सबसे बदनाम ब्लैक स्पॉट में शामिल है। नेशनल हाईवे पर इस जगह न तो डिवाइडर ठीक तरह बने हैं और नहीं चौराहे को बेहतर ढंग से विकसित किया गया है। आए दिन यहां पर दुर्घटना होती है। पुलिस रिकॉर्ड की बात करें, तो 500 मीटर के दायरे में यहां तीन साल में 30 से ज्यादा दुर्घटनाओं में 10 लोगों की मौत हो चुकी है। अब यहां पर ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए हैं, मगर इनसे भी यातायात में गफलत की स्थिति रहती है।
छिद्दरवाला भी ब्लैक स्पॉट सूची से बाहर
कुछ साल पहले छिद्दरवाला को ब्लैक स्पॉट घोषित किया गया था। दो साल पहले सड़क फोरलेन हो गई, तो लगा कि अब यहां पर दुर्घटनाएं कम होंगी, लेकिन हालात जस के तस हैं। हाल ही में एक सड़क दुर्घटना में यहां मां-बेटे की मौत हुई थी। बार-बार सर्वे के बाद भी यह स्थान ब्लैक स्पॉट की सूची से बाहर नहीं आया है। इंसेट---
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ये होते हैं ब्लैक स्पॉट
सड़क सुरक्षा समिति में ब्लैक स्पॉट की परिभाषा की जाती है। ये 500 मीटर की वह दूरी होती है, जिसमें तीन साल में पांच दुर्घटनाएं ऐसी होती हैं, जिनमें मौत हुई हो और गंभीर रूप से घायल हुए हों। साथ ही उन स्थानों को भी ब्लैक स्पॉट कहा जाता है, जहां पर तीन कैलेंडर वर्ष में सड़क दुर्घटनाओं में 10 या ज्यादा मौत हो चुकी हों। इस तरह राजधानी की सड़कों पर 46 स्थान हैं।
हर साल होती हैं 100 से 120 मौत
राजधानी और देहात क्षेत्र में हर साल करीब 300 छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं होती हैं। इनमें 100 से 120 मौतें होती हैं। ज्यादातर दुर्घटनाएं इन्हीं ब्लैक स्पॉट और दुर्घटना संभावित स्थलों पर ही होती हैं। इन दुर्घटनाओं को कम करने के लिए ही लोनिवि और अन्य जिम्मेदार विभागों को सुधार के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन लंबे समय से यहां पर कोई सुधार नहीं हुए हैं।
बहुत से स्थान नहीं होते सूची में
बहुत से ऐसे स्थान भी होते हैं, जो इस सूची में नहीं आ पाते हैं। इन जगहों पर होने वाली दुर्घटनाओं की रिपोर्ट नहीं की जाती है। यहां या तो दोनों पक्षों में समझौता हो जाता है या फिर किसी अन्य कारण से यह रह जाते हैं। यदि इन स्थानों की रिपोर्ट हो तो ब्लैक स्पॉट की संख्या बढ़ भी सकती है।
यातायात पुलिस हर दो साल में सड़कों पर ब्लैक स्पॉट और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों का सर्वे करता है। इन्हें यातायात पुलिस सड़क सुरक्षा समिति को बताती है। वहीं पर जिम्मेदार लोगों को इन्हें दुरुस्त करने और चेतावनी बोर्ड आदि लगाने के लिए कहा जाता है। अब जल्द ही कुछ और सर्वे भी होना है।
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-अक्षय प्रह्लाद कोंडे, एसपी यातायात
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