जिले के सीमांत तहसील क्षेत्र त्यूणी में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन तो बना दिया, लेकिन पीएचसी का उच्चीकरण नहीं किया गया। तहसील मुख्यालय से पांच किलोमीटर दूर उप जिला अस्पताल का निर्माण शुरू हुआ तो मौजूदा पीएचसी को पीएचसी टाइप ए कर दिया गया गया। यहां मरीजों को केवल प्राथमिक उपचार ही मिल पाता है। ऑपरेशन, विशेषज्ञ चिकित्सा और इमरजेंसी में दुर्गम क्षेत्र से 120 किलोमीटर दूर उप जिला अस्पताल विकासनगर में आना पड़ता है।
त्यूणी तहसील क्षेत्र की आबादी करीब 36 हजार है। इतनी बड़ी आबादी को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाने के लिए यहां केवल एक पीएचसी है। करीब 10 साल पहले पीएचसी को उच्चीकृत करने के लिए यहां सीएचसी के भवन का निर्माण हुआ था। अस्पताल के बाहर सीएचसी का बोर्ड भी लग गया, लेकिन पीएचसी का उच्चीकरण नहीं किया गया। अस्पताल में रोजाना 100 से 120 मरीज आते हैं। यहां नर्सिंग स्टॉफ नहीं हैं। एकमात्र चिकित्सक की देखरेख में एएनएम हर माह 20 से 25 सामान्य प्रसव करवाती हैं। सिजेरियन के लिए गभर्वतियों को उप जिला अस्पताल विकासनगर रेफर किया जाता है। अस्पताल में डीएम सोनिका के आदेश पर अल्ट्रासाउंड शुरू हुए थे, लेकिन यह सुविधा मरीजों को माह में एक बार ही मिलती है।
वर्ष 2016-17 में तहसील मुख्यालय से पांच किलोमीटर दूर सुखेड़ (नेवल) में 100 बेड की क्षमता वाले उप जिला अस्पताल के भवन और नर्सिंग कॉलेज का निर्माण शुरू हुआ। छह साल में अस्पताल का केवल 30 बेड की क्षमता का एक भवन ही बन पाया है। भवन का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। कार्यदायी संस्था यूपी निर्माण निगम दिसंबर में भवन को स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित करने का दावा कर रहा है। वहीं, दूसरे चरण में अनुबंध की प्रकिया पूरी होने के साथ 70 बेड के भवन का निर्माण अगले सप्ताह से शुरू होने की बात कही जा रही है।
Iउप जिला अस्पताल आया तो पीएचसी का घट गया ग्रेडI
- पीएचसी में पहले चिकित्सक के तीन पद थे। करीब दो साल पहले पीएचसी को पीएचसी टाइप ए कर दिया गया है। यहां एक मात्र चिकित्सा प्रभारी 100 से 120 मरीजों को देखते हैं। इमरजेंसी भी उनके ही भरोसे है। रात को एक्सरे भी उनको अपनी निगरानी में करवाने पड़ते हैं। स्टॉफ नर्स का पद भी रिक्त है। चिकित्सा प्रभारी की देखरेख में एएनएम सामान्य प्रसव करवाती हैं।
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Iनर्सिंग कॉलेज और 100 बेड के अस्पताल के निर्माण कार्य का पहला फेज पूरा हो चुका है। दूसरे फेज के लिए पांच करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया है। जल्द ही दूसरे फेज का काम शुरू हो जाएगा। अभी भवन निर्माण और चिकित्सकों के पद सृजित करने में समय लगेगा। मौजूदा पीएचसी में टाइप ए के मानक के अनुसार ही चिकित्सक और स्टॉफ के पद सृजित हैं।
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Iडॉ. संजय जैन, सीएमओI