जौनसार बावर क्षेत्र में पांच दिनों तक चलने वाली दिवाली मंगलवार को छोटी दिवाली (होलियात) से शुरू हो गया। बुधवार ब्रह्ममुहूर्त में ग्रामीण पंचायती आंगन में एकत्र हुए। ग्रामीणों ने ढोल-दमाऊ की थाप पर नृत्य करते हुए भीमल की लकड़ी की मशाल जलाई। उसके बाद अखरोट की भिरूड़ी फेंकी।
चकराता क्षेत्र में ग्रामीणों ने भिरूड़ी पर्व पर मंदिरों में पूजा-अर्जना कर खुशहाली और फसल के अच्छे उत्पादन की कामना की। सभी परिवारों अखरोट एकत्रित किए। अखरोट को गांव के मुखिया ने पंचायती आंगन में उछाला। ग्रामीणों ने इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। उपलगांव खत सदर स्याणा दिनेश सिंह, सैली खत के सदर स्याणा राजेंद्र सिंह सिंह, कोरू खत सदर स्याणा सुनील जोशी, द्वार खत के सदर स्याणा रजनीश नेगी, बमठाड़ खत के सदर स्याणा मातबर सिंह आदि ने बताया मंगसीर मास की अमवस्या से शुरू हुई बूढ़ी दिवाली पर महिलाएं और पुरूष पारंपरिक वेशभूषा में पंचायती आंगन में एकत्र होते हैं। लोक संस्कृति पर आधारित देर रात्रि तक गीत, हारुल, जेंता, रासों, जंगबाजी, जुड्डा नृत्य करते हैं।
Iपांच दिनों का पर्वI
पहले दिन छोटी दीवाली, दूसरे दिन भिरूड़ी, तीसरे दिन जंदोई, चौथे दिन काठ की लकड़ी से निर्मित हिरण नृत्य और पांचवे और अंतिम दिन काठ की लकड़ी से निर्मित हाथी नृत्य होता है। गांव के स्याणा राजा के वेष में सजधज कर तलवार लेकर हाथी पर बैठकर नृत्य करते हैं।