शोध कार्य में मददगार साबित होगी किताब
दून विवि की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा, यह किताब भविष्य में गढ़वाली भाषा में शोध कार्य करने में छात्रों के लिए मददगार साबित होगी। वह सिर्फ गीतकार या लोक गायक ही नहीं हैं बल्कि लोक संगीत की पूरी यूनिवर्सिटी हैं। उनकी यह यात्रा उन्हें नरू भैजी से लीजेंड नरेंद्र सिंह नेगी बनाती है। पूर्व डीजीपी व वरिष्ठ साहित्यकार अनिल कुमार रतूड़ी ने कहा, नेगी दा उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर हैं।
हाथरस से आए प्रमोद शर्मा ने गाया गढ़वाली गीत
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के हाथरस से आए प्रमोद शर्मा ने गढ़वाली गीत गाया तो सभागार तालियों की आवाज से गूंज उठा। प्रमोद ने बताया, साल 2011 में उन्होंने उत्तराखंड में एक बैंक में सेवाएं दी थीं। उसी दौरान नेगी दा के कई गीत सुने। इनसे प्रभावित होकर उन्होंने भी गढ़वाली में गीत गाना शुरू किया और हाल ही में दुबई में भी उन्होंने नेगी दा का के गीत की प्रस्तुति दी।
कलाकारों ने गीतों से बांधा समा
कार्यक्रम में युवा कलाकार प्रतीक्षा बमराडा, विनोद चौहान, विवेक नौटियाल, रोहित चौहान, शैलेंद्र पटवाल ने नेगी दा के कई गीतों की प्रस्तुति से समा बांध दिया। गीतकारों का सहयोग सुभाष पांडे, सुमित गुसाईं, विकास चमोली और महेश चंद्र ने दिया।
समाज ने नेगी दा को नवाजा
उत्तराखंड लोक समाज की ओर से नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान की भी घोषणा की। सबसे पहले नेगी दा को इस सम्मान से नवाजा गया। अब यह सम्मान हर साल साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कलाकारों को दिया जाएगा।
नेगी दा ने सीएम की फरमाइश पर गाया गीत
गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की फरमाइश पर लोक गीत ठंडो रे ठंडो... गीत प्रस्तुत किया तो सभा में मौजूद सभी लोग भावविभोर हो गए। उन्होंने प्रदेश के पलायन के दर्द को गीत से बयां किया तो लोगों की आंखें नम हो गईं। किताब के बारे में उन्होंने कहा, लेखक ने इस पुस्तक के जरिए उन शब्दों और वाक्यों को पकड़ा है, जो लोगों तक नहीं पहुंच पाते। लेखक सिर्फ गीतों तक सीमित नहीं रहे, उन्होंने अपने भाव और विचार भी रखे।