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शादी की डोर कमजोर होने का सबसे बड़ा कारण

Fri, 27 Sep 2013 09:08 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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देहरादून स्थित महिला हेल्प लाइन में पहुंचे ज्यादातर केस ऐसे हैं जो शादी में उपजे विवाद के हैं। पिछले एक से डेढ़ साल के मामलों पर नजर डाली जाए तो 100 में से करीब 75 मामले ऐसे ही हैं।
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हाल ये है कि वर्ष 2012 में हुई शादी महज एक ही साल में टूटने की कगार पर है। कई मामले यहां से कोर्ट पहुंच गए हैं तो कई में काउंसिलिंग चल रही है। वजह देखी जाए तो पति-पत्नी दोनों ही एक-दूसरे की आदतों के चलते साथ नहीं रहना चाहते। किसी तरह का समझौता भी उन्हें मंजूर नहीं।

सब्जी भी बन रही झगड़े की वजह
धर्मपुर निवासी रेनू (बदला हुआ नाम) की शादी पिछले साल हुई। उसका अपने पति से अक्सर झगड़ा हो जाता है। बात
बढ़ी तो दोनों महिला हेल्प लाइन पहुंचे।

काउंसिलिंग में दोनों एक-दूसरे की छोटी-छोटी कमियां गिनाने लगे। रेनू को पति का समय पर सब्जी न लाना, घर न आना जैसी दिक्कतों से परेशानी है तो पति को रेनू का ज्यादा बोलना पसंद नहीं। दोनों की अभी एक ही काउंसिलिंग हुई है।
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बार-बार फोन करता है पति
करनपुर निवासी आशा (बदला हुआ नाम) को दिक्कत है तो इससे कि उसका पति दिनभर उसे फोन कर समय-समय पर उसकी चिंता करता रहता है। वो कहती है पति ऐसा इसलिए करता है क्योंकि वो मुझ पर शक करता है।

जबकि पति का कहना है कि मुझे आशा की बहुत चिंता रहती है इसलिए मैं उससे पूछता रहता हूं कि वो कहां है, क्या कर रही है। इस मामले की भी काउंसिलिंग चल रही है।

हेल्प लाइन में पहुंचे 100 मामलों में से इस समय करीब 75 मामले एक साल की शादी वाले हैं। इनमें जहां तक मैंने काउंसिलिंग करा समझने की कोशिश की है तो आपसी झगड़ो में कोई ठोस वजह निकलकर नहीं आई। बस पति-पत्नी दोनों एक-दूसरे की छोटी-छोटी आदतों से परेशान हैं। दोनों में न तो कोई एक-दूसरे को समझना चाहता है और न किसी तरह का समझौता चाहता है। काउंसिलिंग कराकर घर जोड़ने का पूरा प्रयास किया जाता है।
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- दीपिका राणा, प्रभारी महिला हेल्प लाइन

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