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#LadengeCoronaSe: साधनविहीन बच्चों का ध्यान, स्मार्ट क्लास से दे रहे हैं ज्ञान

Tue, 11 Aug 2020 12:29 PM IST
दुष्यंत शर्मा कुंदन बिष्ट, काशीपुर
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बदलाव का वक्त... - फोटो : अमर उजाला
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लॉकडाउन के दौरान घरों में कैद रहे साधन विहीन बच्चों की रचनात्मकता को बनाए रखने के लिए एक ट्रस्ट आगे आया है। ट्रस्ट की पहल को एक एनजीओ और उपखंड शिक्षाधिकारी का भी साथ मिला है। काशीपुर के ऑन चैरिटेबल ट्रस्ट के सदस्य आदित्य गुप्ता ने कीप चिल्ड्रन रीडिंग ग्रुप से बच्चों को जोड़ा। उन्हें रोज हिंदी और अंग्रेजी की कहानियों के वीडियो भेजने शुरू किए। कई बच्चे तो अंग्रेजी में भी उत्तर दे रहे हैं। इस ग्रुप से अब सरकारी स्कूलों के बच्चे भी जुड़ गए हैं।

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पहले आम बच्चों को जोड़ा
आदित्य गुप्ता बताते हैं कि लॉकडाउन के दौरान निजी स्कूलों के बच्चों की तो ऑनलाइन क्लास जारी है, लेकिन उन्हें ऐसे बच्चों की चिंता थी जो ऑनलाइन क्लास के बारे में जानते तक नहीं। ऐसे में बुक स्मार्ट एप के जरिए कीप चिल्ड्रन रीडिंग कार्यक्रम का विचार आया। मां नमिता गुप्ता से बात की जो आन चैरिटेबल ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी भी हैं। पहले चरण में आदित्य ने अपने पिता के पेट्रोल पंप पर काम करने वाले सेल्समैंस के 20 बच्चों को जोड़ा और उन्हें ऑनलाइन शिक्षा देना शुरू की।

कीप लर्निंग के संदेश के साथ बढ़ता गया दायरा 
ग्रुप के माध्यम से बच्चों को रोजाना एक नए शब्द, हिंदी और अंग्रेजी की एक कहानी पढ़कर लिखने और उसे सुनाने का टॉस्क दिया जाता है। बच्चे कहानियां लिखकर और पढ़कर सुना रहे हैं। अपना परिचय भी अंग्रेजी में दे रहे हैं। इसमें दादा, दादी, नाना, नानी से सुनी कहानियों को शामिल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बच्चों की ऑन लाइन प्रतियोगिता कराकर पुरस्कार दिए गए हैं।

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सरकारी स्कूल के बच्चों को भी जोड़ा

आदित्य - फोटो : अमर उजाला
आदित्य गुप्ता और उनकी मां नमिता गुप्ता ने अपनी पहल की जानकारी उपखंड शिक्षाधिकारी गीतिका जोशी को दी तो उन्होंने भी इसे सराहा और इस मुहिम में सरकारी स्कूल के बच्चों को शामिल किया। अभिभावकों को भी प्रेरित किया, जिसके बाद कई सरकारी स्कूल के बच्चे भी इस प्रोग्राम से जुड़ गए। नमिता गुप्ता और उपखंड शिक्षाधिकारी गीतिका जोशी दोनों ने मिलकर शिक्षा सामग्री तैयार की।

कीप चिल्ड्रन लर्निंग प्रोग्राम से मैं प्रभावित हुई। इसके तहत हमने अपने सरकारी स्कूलों के बच्चों को भी इसमें जोड़ा। बच्चों को रोजाना हिंदी और अंग्रेजी कहानियों की वीडियो बानकर ग्रुप में भेजी गई। बच्चों ने इन कहानियों को पढ़ा और सुना। साथ ही इन कहानियों को स्वयं लिखकर या बोलते हुए वीडियो बनाकर ग्रुप में भेजी। यह प्रोग्राम वर्तमान में भी चल रहा है। 
-गीतिका जोशी, उपखंड शिक्षाधिकारी, काशीपुर।

(फेसबुक ने इस शृंखला के लिए हमारे साथ भागीदारी की है, लेकिन इस कड़ी में प्रकाशित होने वाले समाचारों पर कोई संपादकीय नियंत्रण नहीं लगाया है।)
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