उत्तरांचल विश्वविद्यालय में पर्यावरणीय स्थिरता के लिए कृषि, इंजीनियरिंग, अनुप्रयुक्त और जीवन विज्ञान में हालिया प्रगति पर 10वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन हुआ। इस मौके पर विश्वविद्यालय के अध्यक्ष जीतेंद्र जोशी ने नवीन कृषि पद्धतियों के महत्व पर जोर दिया और उत्तराखंड के उत्तरकाशी के मोरी जिले में सेब के बागानों के सफल उदाहरण का उल्लेख किया, जो ऑफ-सीजन में फल पैदा करते हैं।
उन्होंने प्रतिभागियों को कृषि उद्यमिता के लिए सावधानीपूर्वक योजनाएं बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। कुलपति प्रो. धरम बुद्धि ने राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। प्रो-कुलपति प्रोफेसर राजेश बहुगुणा ने टिकाऊ कृषि पद्धतियों के महत्व पर जोर दिया, जो खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक है। इस दौरान स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर के निदेशक और आयोजन अध्यक्ष प्रोफेसर महिपाल सिंह ने भी विचार रखे।
विशिष्ट अतिथि डॉ. संजय कुमार झा ने भारत और नेपाल के बीच नवीन अनुसंधान सहयोग पर प्रकाश डाला। सम्मेलन संयोजक डॉ. सर्वेश रस्तोगी ने फसल वृद्धि और उपज में सुधार पर जानकारी दी। सम्मेलन में पांच तकनीकी सत्र होंगे, इसमें 74 विशेषज्ञ मौखिक और पोस्टर प्रस्तुतियां देंगे। इस मौके पर डॉ. कार्तिक गौड़, केबी पोखरियाल, डॉ. रामवीर तंवर, डॉ. अमित भट्ट आदि मौजूद रहे।