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ऐसे तुरंत हो जाएगा दूध का दूध, पानी का पानी

Thu, 11 Jun 2015 03:51 PM IST
अंकित कुमार गर्ग/ अमर उजाला, रुड़की
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दूध का दूध, पानी का पानी- यह पुरानी कहावत है। इसे अब वैज्ञानिकों ने शोध से सच कर दिखाया है।
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अब कोई भी कुछ ही पलों में मिलावटी दूध का पता लगा सकता है। आईआईटी वैज्ञानिकों ने इसके लिए किट तैयार की है। इसमें गोल्ड नैनो पार्टिकल बेस्ड एप्टामर की कुछ बूंदें यूरिया से बने दूध का रंग बैंगनी कर देंगी, जबकि शुद्ध दूध का रंग लाल हो जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय जर्नल में इस शोध की प्रमाणिकता को स्वीकार कर लिया गया है। अब आईआईटी के वैज्ञानिक इसके पेटेंट की तैयारी कर रहे हैं।

आईआईटी रुड़की के डिपार्टमेंट आफ बायोटेक्नोलॉजी के वैज्ञानिक डॉ. नवीन कुमार नवानी और पोस्ट डॉक्टरल फेलो डॉ. पीयूष कालरा ने दूध में यूरिया की मिलावट कुछेक पलों में जानने के लिए किए गए शोध पर कामयाबी पाई है।
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यह शोध 24 जुलाई, 2014 को राष्ट्रपति भवन में भी प्रस्तुत किया जा चुका है। इसके अलावा यह अंतरराष्ट्रीय जर्नल ‘बायोसेंसर एंड बायो इलेक्ट्रानिक्स’ में भी प्रकाशित हो चुका है। इन वैज्ञानिकों का दावा है कि कुछ ही पलों में मिलावटी दूध की पहचान करने वाला यह पहला शोध है।
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स्ट्रिप डुबाते ही खुलेगी पोल

शोध के अंतर्गत पेपर पर सेंसर बनाने की तैयारी चल रही है। इसके बाद ड्रॉप युक्त पेपर की स्ट्रिप को दूध में डुबाते ही यह मिलावटी दूध का रंग बदल देगी।

सिंथेटिक दूध में यूरिया के अलावा सोडियम क्लोराइड, सोडियम बायोकार्बोनेट, वेजीटेबल आयल, डिटर्जेंट और पानी की पहचान के लिए शोध पर काम चल रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार जल्द ही इसकी किट भी तैयार कर ली जाएगी।

आएगा सात से आठ रुपये का खर्च
किट की 50 माइक्रो लीटर यानी चार बूंदों को दूध की 10 से 12 बूंदों में डालने पर ही यह असली और नकली दूध के अंतर को साबित कर देगा। वैज्ञानिकों के अनुसार पेटेंट के बाद बाजार में आने पर एक टेस्ट में सात से आठ रुपये का खर्च आने का अनुमान है।

पहले जांच में लगते थे कई दिन
पहले फूड इंस्पेक्टर खराब दूध की आशंका के चलते उसे नष्ट करा देते थे और सैंपल को जांच के लिए भेज दिया जाता था। रिपोर्ट कई दिनों के बाद मिलती थी।

डॉ. पीयूष कालरा ने बताया कि अभी तक नकली दूध की जांच के लिए यूरिएज एंजाइम (प्रोटीन) से इसकी जांच होती थी। यह सामान्य तापमान पर परिणाम नहीं देते। इसी वजह से इसकी जांच के लिए सैंपल को लैब में भेजा जाता था।
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