कोर्ट ने देहरादून के मामले को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया था। सुनवाई में यह भी सामने आया था कि यौन शोषण में शामिल किशोरों ने पहले अश्लील साइट पर आपत्तिजनक फिल्म देखी और उसके बाद अपने ही स्कूल की नाबालिग छात्रा का सामूहिक रूप से यौन शोषण किया।
कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया था कि जो इंटरनेट लाइसेंसी जुलाई 2015 में जारी अधिसूचना का पालन नहीं करते हैं, उनके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत लाइसेंस निरस्त किये जाएं।
केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट को यह भी बताया गया कि आनलाइन साइबर अपराध पर नियंत्रण के लिये एक पोर्टल लांच किया गया है। कोर्ट ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह को भी निर्देश दिया कि इस पोर्ट (साइबरडॉटइन) का मीडिया के माध्यम से प्रदेश में उचित प्रचार किया जाए। अब सुनवाई 26 नवंबर को होगी।